बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन गुरुवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही NEET पेपर लीक और पटना में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के मुद्दे पर जोरदार हंगामा शुरू हो गया। विपक्षी विधायकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक आमने-सामने आ गए। तीखी नोकझोंक के बीच सदन में हाथापाई जैसी स्थिति बन गई।
हंगामे के दौरान बीजेपी विधायक श्याम बाबू यादव ने बुधवार को पटना के डाकबंगला चौराहे पर हुए प्रदर्शन को लेकर विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में छात्र नहीं, बल्कि “गुंडे” शामिल थे और उन पर व उनके सुरक्षाकर्मियों पर हमला किया गया। उन्होंने दावा किया कि “कल मेरी हत्या हो जाती।”
श्याम बाबू यादव के बयान के बाद सदन का माहौल और गर्म हो गया। स्थिति बिगड़ती देख विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने दोनों पक्षों को फटकार लगाते हुए कहा, “यह सदन है, कोई युद्ध का मैदान नहीं।” उन्होंने सभी सदस्यों से सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहने पर कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

वहीं, विपक्षी विधायक विधानसभा परिसर के बाहर भी धरने पर बैठे। उन्होंने ‘भाजपा हटाओ, शिक्षा बचाओ’, ’10 वर्षों में 152 पेपर लीक क्यों?’ और ‘छात्रों पर पुलिस बर्बरता बंद करो’ जैसे पोस्टरों के साथ प्रदर्शन किया। विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की।
सदन के भीतर और बाहर जारी विरोध प्रदर्शन के कारण विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने के महज आठ मिनट बाद ही स्थगित करनी पड़ी। इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ा दिया।
@MUSKAN KUMARI





