पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए अब केवल एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है। यह मुकाबला पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की राजनीतिक प्रतिष्ठा और संगठन की कार्यक्षमता की भी बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। दो दिवसीय पटना दौरे के दौरान नितिन नवीन ने चुनावी तैयारियों की समीक्षा की, जिसमें एक आंतरिक रिपोर्ट ने संगठन के भीतर कई सवाल खड़े कर दिए।
सूत्रों के अनुसार, समीक्षा बैठक में सामने आई रिपोर्ट में बताया गया कि कुछ स्थानीय नेता और उपचुनाव के लिए नियुक्त कई स्टार प्रचारक अभी तक अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा पाए हैं। रिपोर्ट के बाद नितिन नवीन ने संबंधित नेताओं की चुनावी भूमिका, क्षेत्र में उनकी मौजूदगी और प्रचार अभियान से दूरी के कारणों का अलग-अलग ब्योरा मांगा है।
भाजपा ने बांकीपुर उपचुनाव के लिए बूथ स्तर तक विस्तृत रणनीति तैयार की है। पार्टी ने 60 शक्ति केंद्र, 50 से अधिक विधायक एवं विधान पार्षदों की जिम्मेदारी तय करने के साथ बूथ मैनेजमेंट नेटवर्क के जरिए माइक्रो प्लानिंग की है। इसके बावजूद टिकट की दौड़ में शामिल रहे कुछ प्रभावशाली नेताओं की सीमित सक्रियता संगठन के भीतर चर्चा का विषय बनी हुई है।

इसी क्रम में पटना की मेयर सीता साहू की भूमिका भी चर्चा में है। साहू (तेली) समाज की प्रमुख नेता मानी जाने वाली सीता साहू से पार्टी को समाज आधारित बैठकों, महिला सम्मेलनों और जनसंपर्क अभियानों में सक्रिय भूमिका की उम्मीद थी। हालांकि, अब तक उनकी कोई बड़ी सार्वजनिक चुनावी गतिविधि सामने नहीं आई है। पार्टी के भीतर इसे सामाजिक समीकरण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जबकि सूत्र इसे स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों और सीमित जिम्मेदारियों से जोड़कर देख रहे हैं। साथ ही यह भी चर्चा है कि बेटे को टिकट नहीं मिलने से उनकी नाराजगी इसकी एक वजह हो सकती है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
भाजपा ने मतदाताओं को चार श्रेणियों—A, B, C और D—में विभाजित कर चुनावी रणनीति बनाई है। पार्टी का सबसे अधिक फोकस C श्रेणी यानी असमंजस में रहने वाले मतदाताओं को अपने पक्ष में करने पर है। पूरे बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र को 10 मंडलों में बांटा गया है, जहां अस्थायी चुनाव कार्यालय स्थापित किए गए हैं। बूथ अध्यक्ष से लेकर मंडल अध्यक्ष तक रोजाना फीडबैक लिया जा रहा है और उसी के आधार पर अगले दिन की चुनावी रणनीति तैयार की जा रही है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन स्वयं चुनावी तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं। ऐसे में बांकीपुर उपचुनाव अब केवल उम्मीदवारों की नहीं, बल्कि संगठन की क्षमता, सामाजिक समीकरण और नेतृत्व की साख की भी अहम परीक्षा बन गया है।
@MUSKAN KUMARI






