अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चंबल अभयारण्य में ‘पर्यावरणीय तबाही’ की चेतावनी

घड़ियाल संरक्षण पर मंडराया खतरा, कार्रवाई नहीं हुई तो अर्धसैनिक बल तैनात करने के संकेत

नई दिल्ली, 

Supreme Court of India ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में फैले National Chambal Gharial Sanctuary में हो रहे अवैध खनन पर गंभीर चिंता जताई है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियों से न केवल पर्यावरणीय संकट गहरा रहा है, बल्कि बड़े पैमाने पर तबाही भी हो रही है।

घड़ियाल संरक्षण पर बड़ा खतरा

अदालत ने कहा कि चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन के कारण घड़ियाल संरक्षण परियोजना पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। यह अभयारण्य दुर्लभ और संकटग्रस्त घड़ियालों का प्रमुख आवास है, जहां उनकी सबसे बड़ी आबादी पाई जाती है। मामले की अगली सुनवाई 11 मई को होगी।

मध्य प्रदेश सरकार को चेतावनी

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मध्य प्रदेश सरकार को कड़ी चेतावनी दी। कोर्ट ने कहा कि यदि राज्य सरकार खनन माफिया के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई और अभियोजन शुरू करने में विफल रहती है, तो अदालत अर्धसैनिक बलों की तैनाती का आदेश देने से भी पीछे नहीं हटेगी।

पारिस्थितिकी पर गंभीर असर

अदालत ने इस क्षेत्र को पारिस्थितिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बताते हुए कहा कि बड़े पैमाने पर अवैध खनन से नदी तंत्र, वन्यजीव और जैव विविधता पर गंभीर असर पड़ रहा है। यह अभयारण्य तीन राज्यों में फैला एक महत्वपूर्ण संरक्षित क्षेत्र है, जो चंबल नदी के स्वच्छ और प्राकृतिक प्रवाह के लिए जाना जाता है।

जैव विविधता का केंद्र

करीब 5,400 वर्ग किलोमीटर में फैले इस अभयारण्य में न सिर्फ घड़ियाल, बल्कि गंगा डॉल्फिन, मगरमच्छ, कछुओं की कई प्रजातियां और 300 से अधिक पक्षी प्रजातियां भी पाई जाती हैं। ऐसे में अदालत ने साफ किया कि इस क्षेत्र की सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

@MUSKAN KUMARI

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Author: NCRLOCALDESK

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