नई दिल्ली/पटना:
देश में शिक्षा एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गई है। केंद्र सरकार ने बिहार, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में चार नए केंद्रीय विद्यालय खोलने को मंजूरी दी है। केंद्रीय विद्यालय संगठन के तहत शुरू होने वाले ये विद्यालय इसी शैक्षणिक सत्र से संचालित होंगे।
सरकार का दावा है कि इस फैसले से शिक्षा तक पहुंच आसान होगी और पिछड़े इलाकों में शैक्षणिक ढांचा मजबूत होगा। वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बता रहा है, जिससे सियासी माहौल गरमा गया है।
दरभंगा और शामली में शुरुआती कक्षाएं
बिहार के दरभंगा (एम्स परिसर) और उत्तर प्रदेश के शामली में बालवाटिका से लेकर कक्षा 5 तक की पढ़ाई शुरू की जाएगी। जबकि जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में सीधे कक्षा 1 से 5 तक की पढ़ाई का संचालन होगा।
जब तक स्थायी भवन तैयार नहीं हो जाते, तब तक ये स्कूल अस्थायी रूप से सरकारी स्कूल परिसरों या निर्धारित भवनों से चलाए जाएंगे। सरकार का कहना है कि यह कदम उन क्षेत्रों में उठाया गया है, जहां लंबे समय से बेहतर शिक्षा सुविधाओं की जरूरत महसूस की जा रही थी।
तेजी से पूरी होगी दाखिला प्रक्रिया
केंद्रीय विद्यालय संगठन ने पुष्टि की है कि सभी जरूरी जमीन और अस्थायी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं, जिससे बिना देरी के स्कूल शुरू किए जा सकें। दाखिला प्रक्रिया 30 दिनों के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक बच्चों को लाभ मिल सके।
2026-27 सत्र के लिए एडमिशन शुरू
शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नामांकन प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। कक्षा 1 के लिए पहली अनंतिम सूची जारी कर दी गई है, जबकि अन्य सूचियां सीटों की उपलब्धता के आधार पर जारी की जाएंगी।
सरकार इस पहल को “शैक्षिक न्याय” की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसके पीछे सियासी मंशा होने का आरोप लगा रहा है।
@MUSKAN KUMARI







