भागलपुर और नवगछिया के बीच गंगा पार आवागमन को लेकर सरकार की ओर से की गई बड़ी घोषणा पर अब सवाल उठने लगे हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा यात्रियों और निजी वाहनों के लिए नाव एवं जहाज सेवा को निःशुल्क करने के ऐलान के एक दिन बाद ही एक वायरल वीडियो सामने आने से प्रशासनिक व्यवस्था कटघरे में आ गई है।
रविवार को विक्रमशिला सेतु के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा था कि जब तक पुल पूरी तरह चालू नहीं हो जाता, तब तक गंगा पार करने वाले यात्रियों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया था कि सरकार स्वयं इसकी व्यवस्था करेगी ताकि लोगों को राहत मिल सके।
हालांकि सोमवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में कुछ नाविक कथित तौर पर यात्रियों से किराया वसूलते नजर आ रहे हैं। वीडियो के सामने आने के बाद लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों का जमीनी स्तर पर पालन क्यों नहीं हो रहा है।

नोट: वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार की घोषणा से उन्हें बड़ी राहत की उम्मीद जगी थी। गंगा पार कर रोजाना आने-जाने वाले हजारों यात्रियों को भरोसा था कि अब उन्हें अतिरिक्त खर्च नहीं उठाना पड़ेगा। लेकिन कथित तौर पर किराया वसूली जारी रहने की खबरों ने लोगों की उम्मीदों को झटका दिया है।
इस मामले ने प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं, तो उन्हें लागू कराने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग और जिला प्रशासन की है। ऐसे में कथित वसूली की शिकायतें सामने आना गंभीर विषय है।
राजनीतिक गलियारों में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। विपक्ष सरकार से यह सवाल पूछ सकता है कि राहत संबंधी घोषणा के बावजूद यदि वसूली जारी है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस वायरल वीडियो पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। यदि वीडियो में किए जा रहे दावे सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यशैली पर सवाल खड़े करेगा बल्कि सरकार के लिए भी असहज स्थिति पैदा कर सकता है।
@MUSKAN KUMARI





