राजधानी पटना एक बार फिर रसोई गैस संकट की चपेट में है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि आम लोगों को गैस सिलिंडर के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि 25 दिन बाद बुकिंग कराने के बावजूद सिलिंडर की डिलीवरी 10 से 14 दिन की देरी से हो रही है। पहले जहां सात दिन में डिलीवरी का दावा किया जाता था, अब उपभोक्ताओं को लगातार बदलते मैसेज भेजे जा रहे हैं।
प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक गैस सिलिंडर का बैकलॉग बढ़कर 1,98,015 तक पहुंच गया है। इससे साफ है कि मांग और सप्लाई के बीच बड़ा अंतर पैदा हो चुका है। एडीएम आपूर्ति आरके दिवाकर की अध्यक्षता में हुई बैठक में गैस एजेंसियों ने इसे कुछ एजेंसियों तक सीमित समस्या बताया, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति व्यापक संकट की ओर इशारा कर रही है।
बताया जा रहा है कि रविवार को गैस एजेंसियों द्वारा डिलीवरी बंद रखने से समस्या और बढ़ रही है। इसी दिन करीब 20 हजार से अधिक बुकिंग जमा हो जाती हैं, जिससे बैकलॉग लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रशासन ने एजेंसियों को अन्य दिनों में सप्लाई बढ़ाने का निर्देश दिया है, लेकिन इसका असर अब तक दिखाई नहीं दे रहा।

उधर कमर्शियल गैस सिलिंडर की महंगी कीमतों के कारण होटल, रेस्तरां और अवैध रिफिलिंग गिरोह घरेलू सिलिंडरों का इस्तेमाल कर रहे हैं। मोहल्लों में छोटे सिलिंडरों की अवैध रिफिलिंग का धंधा भी तेजी से फैल रहा है, जहां प्रति किलो 200 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यह पूरा नेटवर्क अब संगठित अवैध कारोबार का रूप ले चुका है।
आंकड़ों के मुताबिक पटना में रोजाना करीब 30,359 सिलिंडरों की जरूरत है, जबकि सप्लाई सिर्फ 28,221 तक ही पहुंच पा रही है। इसी अंतर ने संकट को और गंभीर बना दिया है। शहर की 136 गैस एजेंसियों में से 12 को संवेदनशील घोषित कर वहां पुलिस बल की तैनाती की गई है, लेकिन कालाबाजारी पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकी है।
पिछले तीन महीनों में 28 छापेमारी टीमों ने 29 एफआईआर दर्ज की हैं और 201 सिलिंडर जब्त किए गए हैं। इसके बावजूद आम लोगों की परेशानी कम नहीं हुई है। लगातार बढ़ते संकट ने जनता में नाराजगी और बेचैनी बढ़ा दी है, जबकि व्यवस्था अब भी कागजी सुधारों तक सीमित नजर आ रही है।
@MUSKAN KUMARI






