आतंकी हमला और अचानक बदला प्रधानमंत्री का कार्यक्रम: जम्मू-कश्मीर में खून की होली और सऊदी अरब से नरेंद्र मोदी की वापसी

आतंकी हमला और अचानक बदला प्रधानमंत्री का कार्यक्रम: जम्मू-कश्मीर में खून की होली और सऊदी अरब से नरेंद्र मोदी की वापसी

रिपोर्टर: तनवीर आलम शेख | एशियन टाइम्स, नई दिल्ली

21 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर एक बार फिर आतंक के साए में थर्रा उठा जब सीमावर्ती इलाके पुलवामा और राजौरी में अचानक हुए सिलसिलेवार आतंकी हमलों ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस हमले की गंभीरता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो कि सऊदी अरब दौरे पर थे, को अपना कार्यक्रम बीच में छोड़कर भारत लौटना पड़ा।

हमला दोपहर करीब 2:30 बजे हुआ जब एक गाड़ी में आए आतंकवादियों ने सीआरपीएफ की एक टुकड़ी पर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। चश्मदीदों के अनुसार, हमलावरों ने पहले ग्रेनेड फेंका और फिर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले में 6 जवान शहीद हो गए और 11 गंभीर रूप से घायल हैं।

घटना के बाद पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया और सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया। अब तक 3 आतंकियों को ढेर किया जा चुका है, जिनमें से दो की पहचान विदेशी नागरिकों के रूप में हुई है।

प्रधानमंत्री की अचानक वापसी

इस हमले के ठीक 2 घंटे बाद यह खबर आई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना सऊदी अरब दौरा रद्द कर दिया है। मोदी सऊदी के रियाद शहर में भारतीय प्रवासी मजदूरों से मिलने और भारत-सऊदी निवेश संबंधों को मजबूत करने के लिए पहुंचे थे। लेकिन जैसे ही उन्हें इस हमले की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत अपना कार्यक्रम रद्द कर भारत लौटने का फैसला किया।

सऊदी अरब यात्रा की योजना

मोदी की यह यात्रा बेहद अहम मानी जा रही थी, क्योंकि भारत और सऊदी अरब के बीच कई अरब डॉलर के समझौतों पर हस्ताक्षर होने थे। साथ ही, 12 लाख से ज्यादा भारतीय मजदूर जो खाड़ी देशों में काम करते हैं, उनसे सीधा संवाद इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य था। लेकिन भारत में उत्पन्न असाधारण परिस्थितियों के कारण, यह यात्रा अधूरी ही रह गई।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

घटना के बाद विपक्ष ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा है कि बार-बार खुफिया एजेंसियों की चेतावनियों के बावजूद सुरक्षा चूक कैसे हुई? कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा, “देश की सीमा सुरक्षित नहीं है, और सरकार विदेश में घूम रही थी।” वहीं गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में बयान देते हुए कहा कि, “हमले के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और सख्त जवाब दिया जाएगा।”

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, रूस और फ्रांस ने इस हमले की निंदा की है और को समर्थन का आश्वासन दिया है। खासतौर पर इजरायल ने भारत को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर काम करने की बात कही है।

सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा

घटना के तुरंत बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने सेना प्रमुख, रॉ और आईबी के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। पूरे जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में सुरक्षा को पुनः व्यवस्थित किया जा रहा है, और संवेदनशील इलाकों में अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की गई हैं।

पुलिस और खुफिया एजेंसियों की भूमिका

हमले से पहले खुफिया एजेंसियों ने सीमा पार से घुसपैठ की आशंका जताई थी, लेकिन जिस स्तर का हमला हुआ, उससे यह साफ हो गया कि आतंकवादी संगठन अब नई रणनीति अपना रहे हैं। प्रारंभिक जांच में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा का हाथ बताया जा रहा है।

पीड़ित परिवारों की हालत

शहीद हुए जवानों के परिवारों में मातम पसरा है। सरकार ने शहीदों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है।

लोकसभा चुनाव की आहट और सुरक्षा चिंताएं

यह हमला ऐसे समय पर हुआ है जब देश लोकसभा चुनाव की तैयारी कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले के पीछे भारत की राजनीतिक स्थिरता को नुकसान पहुंचाने की साजिश हो सकती है।

प्रधानमंत्री का बयान

दिल्ली लौटने के बाद पीएम मोदी ने राष्ट्र के नाम संक्षिप्त संबोधन में कहा, “हम इस कायराना हमले को कभी नहीं भूलेंगे। जिन्होंने यह किया है, उन्हें इसकी बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

जम्मू-कश्मीर में हुआ यह आतंकी हमला न केवल हमारी सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि यह संकेत भी है कि देश को आंतरिक और बाहरी दोनों मोर्चों पर सतर्क रहने की जरूरत है। प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा को अचानक रद्द कर लौटना यह दर्शाता है कि भारत सरकार इस संकट को कितनी गंभीरता से ले रही है

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