सारण: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय दारोगा प्रसाद राय की 104वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया जा रहा है। साधारण किसान परिवार से निकलकर बिहार के मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने वाले दारोगा बाबू का जीवन संघर्ष, शिक्षा और जनसेवा की प्रेरक मिसाल माना जाता है।
दारोगा प्रसाद राय का जन्म 2 सितंबर 1922 को सारण जिले के दरियापुर प्रखंड स्थित बजहिया गांव में हुआ था। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा के बाद छपरा के राजेंद्र कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की और कानून की पढ़ाई भी की। कुछ समय तक शिक्षक और वकील के रूप में कार्य करने के बाद वे सक्रिय राजनीति में आए।

स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहने के बाद उन्होंने कांग्रेस के साथ अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। वर्ष 1952 में वे परसा विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक चुने गए। इसके बाद उन्होंने लंबे समय तक जनता के बीच अपनी मजबूत पहचान बनाए रखी।
बिहार की राजनीति में उनका सबसे महत्वपूर्ण दौर वर्ष 1970 में आया, जब उन्होंने 16 फरवरी को बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। लगभग दस महीने तक मुख्यमंत्री रहने के दौरान उन्होंने सामाजिक न्याय, विकास और कमजोर वर्गों के अधिकारों को प्राथमिकता दी।

दारोगा बाबू को गरीबों और वंचितों के अधिकारों के लिए किए गए प्रयासों के साथ-साथ सड़क और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भी याद किया जाता है। गांधी सेतु की परिकल्पना और विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने में उनके योगदान की चर्चा आज भी होती है।
15 अप्रैल 1981 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी राजनीतिक और सामाजिक विरासत आज भी बिहार की राजनीति में प्रासंगिक मानी जाती है। उनकी 104वीं जयंती पर सारण की धरती के इस जननेता के संघर्ष, सादगी और जनसेवा के मूल्यों को याद किया जा रहा है।
@MUSKAN KUMARI





