बगहा। बिहार की राजनीति में भूमि विवादों और राजस्व प्रशासन की कार्यशैली को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। वाल्मीकिनगर से विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर भूमि संबंधी मामलों में कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनके आरोपों से बगहा और वाल्मीकिनगर क्षेत्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि मामला सीधे तौर पर दाखिल-खारिज, भूमि विवाद और सरकारी कार्यालयों में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है।
विधायक ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि वाल्मीकिनगर क्षेत्र के पांचों प्रखंडों में भूमि संबंधी मामलों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हो रही हैं। उनका दावा है कि कुछ अंचल अधिकारियों, राजस्व कर्मियों और भूमाफियाओं की कथित मिलीभगत के कारण आम लोगों को न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल से मुलाकात कर मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग भी की है।
सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा का कहना है कि भूमि विवाद और दाखिल-खारिज से जुड़े मामलों में बड़ी संख्या में लोग जनता दरबार, लोक शिकायत निवारण केंद्र और प्रशासनिक शिविरों में पहुंचते हैं, लेकिन शिकायतों के समाधान के बजाय उन्हें डीसीएलआर कार्यालय भेज दिया जाता है। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के कारण मामलों का निपटारा महीनों और वर्षों तक लंबित रहता है, जिससे आम लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।

विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया और फाइलों की जटिलता के कारण लोग परेशान होते हैं और कई बार रिश्वत देने को मजबूर हो जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि कई मामलों में अवैध कब्जे की शिकायतें भी सामने आई हैं और पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है। उनके अनुसार यह समस्या कुछ घटनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि एक संगठित तंत्र की ओर संकेत करती है।
राजनीतिक दृष्टि से इस मामले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विधायक ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो जनता का आक्रोश बढ़ सकता है और इसका असर कानून-व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। उनके बयान को प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति बढ़ते असंतोष और अविश्वास से जोड़कर देखा जा रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने भी संज्ञान लिया है। जानकारी के अनुसार बगहा डीसीएलआर कार्यालय के कार्यों की समीक्षा और प्राप्त शिकायतों की जांच के लिए संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच के बाद सरकार क्या कदम उठाती है और क्या भूमि मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो पाती है।
फिलहाल विधायक की इस पहल ने भूमि विवादों और राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
@MUSKAN KUMARI





