राजधानी पटना को जाम से राहत दिलाने और उत्तर एवं दक्षिण बिहार को बेहतर कनेक्टिविटी देने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा पटना रिंग रोड प्रोजेक्ट अब प्रशासनिक सुस्ती और फंड की कमी के कारण अटकता नजर आ रहा है। 173.5 किलोमीटर लंबे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का सबसे अहम हिस्सा कन्हौली से शेरपुर तक 8.48 किलोमीटर की सिक्स लेन सड़क फिलहाल कागजी प्रक्रियाओं में उलझा हुआ है।
जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने निर्माण एजेंसी का चयन कर लिया है, लेकिन जिला प्रशासन अब तक संबंधित जमीन एजेंसी को हस्तांतरित नहीं कर पाया है। इसके चलते निर्माण कंपनी को वर्क ऑर्डर जारी नहीं हो सका है। इस देरी को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी सवाल उठने लगे हैं।
पटना, सारण और वैशाली जिलों से गुजरने वाला यह रिंग रोड परियोजना पूरी होने के बाद राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है। योजना के तहत उत्तर बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश से आने वाले भारी वाहनों को सीधे रिंग रोड से गुजारा जाएगा, जिससे पटना शहर में जाम की समस्या कम होने की उम्मीद है। हालांकि वर्तमान स्थिति में परियोजना की गति बेहद धीमी बनी हुई है।

परियोजना के लिए 177.07 एकड़ जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए कुल 254.37 करोड़ रुपये मुआवजा निर्धारित किया गया है, लेकिन अब तक केवल 12.52 करोड़ रुपये का ही भुगतान हो सका है। प्रशासन ने 912 अवार्ड तैयार किए हैं, मगर कई मामलों में पारिवारिक बंटवारा विवाद, एक से अधिक दावेदार और मुआवजा बढ़ाने की मांग के कारण किसानों तक राशि नहीं पहुंच पाई है।
सबसे बड़ा मुद्दा फंडिंग को लेकर सामने आया है। केंद्र सरकार ने अपने हिस्से के 127 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं, लेकिन राज्य सरकार की ओर से पथ निर्माण विभाग का अंशदान अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। विपक्ष इसे “डबल इंजन सरकार” की धीमी कार्यशैली करार दे रहा है, जबकि सरकार प्रशासनिक प्रक्रियाओं का हवाला देकर बचाव में जुटी है।
गौरतलब है कि इस परियोजना को 13 जनवरी 2026 को राज्य कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी थी। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो पाई है। ऐसे में अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या पटना रिंग रोड परियोजना भी अन्य लंबित योजनाओं की तरह फाइलों और प्रक्रियाओं में उलझकर रह जाएगी।
@MUSKAN KUMARI





