बिहार पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में आपातकालीन सहायता सेवा ‘डायल-112’ (ERSS) लोगों के लिए बेहद प्रभावी साबित हो रही है। 08 जुलाई 2022 को शुरू हुई इस सेवा के माध्यम से अब तक 55 लाख से अधिक नागरिकों को तत्काल मदद पहुंचाई जा चुकी है। राज्य के किसी भी हिस्से से नागरिक कॉल, एसएमएस, 112 इंडिया ऐप, एसओएस और वेब पोर्टल के जरिए 24 घंटे सहायता प्राप्त कर सकते हैं। यह एकल हेल्पलाइन पुलिस, फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस और बाल हेल्पलाइन जैसी सेवाओं को जोड़ती है।
बिहार पुलिस के अनुसार डायल-112 का रिस्पॉन्स टाइम अब औसतन 11 मिनट से भी कम हो गया है। पूरे राज्य में 1833 इमरजेंसी रिस्पॉन्स व्हीकल (ERV) तैनात हैं, जिनमें 1283 चार पहिया और 550 दो पहिया वाहन शामिल हैं। वर्तमान में प्रतिदिन औसतन 6500 से अधिक लोगों को इस सेवा का लाभ मिल रहा है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक है। खास बात यह है कि पटना स्थित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में कॉल रिसीव करने वाली 346 कर्मी प्रशिक्षित महिला पुलिसकर्मी हैं।
स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB) के विश्लेषण के मुताबिक डायल-112 की सक्रियता के कारण वर्ष 2025 में हत्या के मामलों में 22 प्रतिशत, लूट की घटनाओं में 38 प्रतिशत और महिलाओं के खिलाफ अपराध में 21 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। अब तक घरेलू हिंसा और महिला-बाल सुरक्षा से जुड़े 4.69 लाख से अधिक मामलों में तुरंत सहायता पहुंचाई गई है। वहीं करीब 29.97 लाख स्थानीय विवाद और मारपीट के मामलों में हस्तक्षेप किया गया। इसके अलावा 2.39 लाख सड़क दुर्घटनाओं और 1.30 लाख आगजनी की घटनाओं में भी त्वरित कार्रवाई की गई।

महिला सुरक्षा को लेकर सितंबर 2024 में शुरू की गई “सुरक्षित सफर सुविधा” भी काफी उपयोगी साबित हो रही है। इसके तहत अकेले यात्रा करने वाली महिलाएं अपनी यात्रा की जानकारी डायल-112 के साथ साझा कर सकती हैं, जिसके बाद उन पर तकनीकी निगरानी रखी जाती है और जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता भेजी जाती है। अब तक 217 महिलाओं को इस सुविधा का लाभ मिल चुका है।
बिहार पुलिस मुख्यालय ने डायल-112 को और आधुनिक बनाने की दिशा में भी काम शुरू कर दिया है। पटना के राजीव नगर में 172.80 करोड़ रुपये की लागत से नया अत्याधुनिक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाया जाएगा। साथ ही गया में मिरर साइट इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर भी विकसित किया जाएगा। भविष्य में इस सेवा को NGERSS (नेक्स्ट जनरेशन ERSS) के रूप में अपग्रेड किया जाएगा, जिसमें सोशल मीडिया इंटीग्रेशन, ऑटोमेटेड फीडबैक सिस्टम और CCTNS, रेलवे व NHAI के साथ तकनीकी समन्वय जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी।
@MUSKAN KUMARI





