नई दिल्ली। देशभर में तेजी से बढ़ रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ और साइबर ठगी के मामलों को लेकर केंद्र सरकार अब सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। बुजुर्गों, पूर्व अधिकारियों और कारोबारियों को डराकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोहों पर शिकंजा कसने के लिए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल की है। इसमें बायोमेट्रिक सिम वेरिफिकेशन, संदिग्ध बैंक खातों पर अस्थायी रोक और फर्जी सिम कार्डों को तत्काल ब्लॉक करने जैसे कई अहम सुझाव दिए गए हैं।
अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि साइबर अपराधों में सिम कार्डों का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है। ठग बैंक खातों में पैसा पहुंचते ही उसे कुछ घंटों के भीतर कई खातों में ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे जांच एजेंसियों के लिए आरोपियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
रिपोर्ट में दूरसंचार विभाग (DoT) को निर्देश जारी करने की मांग की गई है कि सिम जारी करने की प्रक्रिया को और सख्त बनाया जाए। इसके तहत टेलीकॉम यूजर की पहचान के लिए बायोमेट्रिक आइडेंटिटी वेरिफिकेशन सिस्टम को तेजी से लागू करने और राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी तंत्र विकसित करने की सिफारिश की गई है।
साथ ही सिम कार्ड एक्टिवेशन में पॉइंट ऑफ सेल वेंडर्स की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि संदिग्ध या फर्जी सिम कार्डों को तुरंत ब्लॉक करने का सिस्टम तैयार किया जाए और जांच एजेंसियों को टेलीकॉम कंपनियों की ओर से रियल-टाइम डेटा उपलब्ध कराया जाए।
सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स, खासकर WhatsApp, के जरिए सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की सलाह दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले का स्वत: संज्ञान लिया है और केंद्र सरकार से ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।
@MUSKAN KUMARI






