पटना में छापेमारी से खुला ‘रिश्वत सिस्टम’ का जाल क्या स्कूल और कॉलेज में पैसे से चलता है काम?

एशियन टाइम्स स्पेशल इन्वेस्टिगेशन
रिपोर्ट: तनवीर आलम शेख

पटना से सामने आई एक बड़ी कार्रवाई ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मौलाना मजहरुल हक अरबी-फारसी विश्वविद्यालय में निगरानी विभाग की छापेमारी और असिस्टेंट रजिस्ट्रार की गिरफ्तारी ने यह बहस फिर तेज कर दी है कि क्या बिहार के स्कूल और कॉलेजों में काम बिना पैसे के होना मुश्किल हो गया है?

क्या है पूरा मामला?

सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति  और रिश्वतखोरी की शिकायतों के आधार पर की गई।

शिकायत मिली थी कि KRC (कॉलेज रिकग्निशन/संबंधित प्रक्रिया) के नाम पर पैसे की मांग की जा रही थी
एक कॉलेज कर्मचारी ने आरोप लगाया कि 2 KRC के लिए कुल 5 लाख रुपये मांगे गए
पहली किस्त के तौर पर 2.5 लाख रुपये लेते समय असिस्टेंट रजिस्ट्रार को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया

गिरफ्तार आरोपी ने दावा किया कि वह सिर्फ “मीडिएटर” था और पैसे ऊपर तक जाने थे।

छापेमारी में क्या मिला?

निगरानी टीम ने पटना स्थित आवास पर छापा मारकर:

बैंक पासबुक
जमीन के कागजात
नकद राशि
इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस

जैसे कई अहम सबूत जब्त किए हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता।

गिरफ्तार आरोपी का बड़ा खुलासा

गिरफ्तार असिस्टेंट रजिस्ट्रार सनाउल्लाह ने दावा किया:

वाइस चांसलर के कहने पर पैसे लिए जा रहे थे
बातचीत का ऑडियो रिकॉर्ड मौजूद है
वह केवल पैसे पहुंचाने का माध्यम था

हालांकि, इस दावे की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अलग-अलग ठिकानों पर रेड जारी

DSP श्याम बाबू प्रसाद के नेतृत्व में टीम:

आवास
कार्यालय
अन्य जुड़े ठिकानों

पर लगातार छापेमारी कर रही है।

इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि मामला बड़ा नेटवर्क हो सकता है।

सबसे बड़ा सवाल: क्या पूरा सिस्टम ही भ्रष्ट है?

यह घटना सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि एक बड़े सवाल को जन्म देती है:

 क्या कॉलेज मान्यता (KRC) पैसे से मिलती है?

कई प्राइवेट कॉलेज संचालकों का आरोप है कि फाइल आगे बढ़ाने से लेकर निरीक्षण तक हर स्तर पर “सेटिंग” करनी पड़ती है।

 क्या स्कूलों में भी यही हाल है?

पटना और आसपास के जिलों में:

एडमिशन फीस के नाम पर वसूली
अनिवार्य किताब-ड्रेस खरीद
फर्जी फाइन और चार्ज

जैसे आरोप पहले भी सामने आते रहे हैं।

क्या अधिकारी–दलाल नेटवर्क बना हुआ है?

इस केस में “मीडिएटर” की बात सामने आने से यह शक और मजबूत होता है कि सिस्टम में कई स्तर पर लोग शामिल हो सकते हैं।

ग्राउंड रिपोर्ट: अंदर से क्या कहते हैं लोग?
कई कॉलेज स्टाफ बताते हैं कि बिना “सिस्टम” के कोई फाइल आगे नहीं बढ़ती
कुछ शिक्षकों का कहना है कि प्रमोशन और पोस्टिंग तक में पैसे की भूमिका होती है
अभिभावक भी फीस और अनियमितताओं से परेशान हैं
सरकार और प्रशासन पर दबाव

इस मामले के सामने आने के बाद:

शिक्षा विभाग पर जवाब देने का दबाव बढ़ गया है
विश्वविद्यालय प्रशासन सवालों के घेरे में है
निगरानी विभाग अन्य लिंक की जांच में जुटा है
निष्कर्ष: एक केस या पूरी व्यवस्था की सच्चाई?

पटना की यह कार्रवाई एक बड़ा संकेत है। यह सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उस सिस्टम की परतें खोल रही है जिसमें:

 काम के बदले पैसे लेना “नॉर्मल” बना दिया गया है
 शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भी भ्रष्टाचार गहराई तक पहुंच चुका है

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या यह सिर्फ एक मामला है, या पूरे सिस्टम की सच्चाई?

एशियन टाइम्स का सवाल

 अगर जांच निष्पक्ष हुई तो क्या बड़े नाम सामने आएंगे?
क्या शिक्षा व्यवस्था को “दलाल सिस्टम” से मुक्त किया जा सकेगा?
 या फिर यह मामला भी समय के साथ दब जाएगा?

Noida Desk
Author: Noida Desk

मुख्य संपादक (Editor in Chief)

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