बेगूसराय के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की वार्डन रिंकू कुमारी की संदिग्ध मौत के मामले में 5 साल बाद बड़ा खुलासा हुआ है। जिस केस को शुरुआती जांच में आत्महत्या बताकर बंद कर दिया गया था, उसे अब एसआईटी ने हत्या करार दिया है। मामले में दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
रिंकू कुमारी का शव 4 अप्रैल 2021 को संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था। उस समय पुलिस और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह फांसी बताई गई थी। लेकिन उनकी बेटियों ने इसे हत्या बताते हुए लगातार न्याय की मांग की। मामला पटना हाई कोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने शुरुआती जांच में गंभीर खामियां पाते हुए नए सिरे से जांच के आदेश दिए।
हाई कोर्ट के निर्देश पर आईपीएस विकास वैभव की निगरानी में गठित एसआईटी ने 13 जुलाई 2026 से जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि फॉरेंसिक रिपोर्ट में पहले ही गला घोंटकर हत्या की आशंका जताई गई थी, जिसे तत्कालीन जांच अधिकारी ने नजरअंदाज कर दिया था। क्राइम सीन री-क्रिएशन और तकनीकी साक्ष्यों से यह स्पष्ट हुआ कि रिंकू कुमारी की पहले हत्या की गई और बाद में घटना को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई।

एसआईटी की जांच में हत्या की वजह ₹15 लाख का आर्थिक विवाद निकला। आरोप है कि रिंकू कुमारी ने जमीन खरीदने के लिए कौशल कुमार को ₹15 लाख दिए थे। पैसे वापस मांगने पर कौशल कुमार ने स्कूल के केयरटेकर अजीत कुमार उर्फ बबलू के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
रिंकू कुमारी की बेटियों ने एसआईटी की कार्रवाई पर संतोष जताते हुए कहा कि 5 साल के लंबे संघर्ष के बाद उनकी मां को आखिरकार न्याय मिला है।
@MUSKAN KUMARI






