शंकराचार्य विवाद पर संत समाज की प्रतिक्रियाएं तेज, स्वामी निश्चलानंद ने अविमुक्तेश्वरानंद को बताया ‘अपना लाडला’

प्रयागराज।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद को लेकर संत समाज के बीच प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। गोवर्धनमठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने माघ मेले में स्थित अपने शिविर में इस पूरे विवाद पर अपनी राय रखते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक बार फिर अपना “लाडला” बताया। उन्होंने कहा कि साधु-संतों के साथ मारपीट करना या ब्रह्मचारियों की चोटियां पकड़कर उन्हें खींचना पूरी तरह गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे शंकराचार्य हों या कोई अन्य साधु-संत, सभी पर स्नान की मर्यादा समान रूप से लागू होती है और इसका पालन होना चाहिए।

इस विवाद पर कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने भी तीखी लेकिन संतुलित प्रतिक्रिया दी। प्रयागराज में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह मामला उनके लिए धर्म संकट जैसा है, क्योंकि दोनों पक्ष अपने ही हैं। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य भगवान स्वरूप होते हैं और उनके खिलाफ किसी तरह की टिप्पणी उचित नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में आए श्रद्धालुओं की चिंता करने वालों की भावना को भी समझा जाना चाहिए। देवकीनंदन ठाकुर ने इस पूरे मामले को आगे न बढ़ाने और आपसी मतभेद भूलकर समाधान निकालने की अपील की। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि जिनके माथे पर तिलक, सिर पर शिखा और शरीर पर भगवा हो, उनकी बात सुनी जानी चाहिए और साधु-संतों के साथ किसी भी तरह की मारपीट नहीं होनी चाहिए।

योगगुरु बाबा रामदेव ने भी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तीर्थ स्थलों पर किसी भी शंकराचार्य या साधु-संत के बीच विवाद नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपसी टकराव से सनातन धर्म की छवि को नुकसान पहुंचता है और सभी को आपस में लड़ने के बजाय सनातन की रक्षा के लिए एकजुट होना चाहिए।

वहीं, श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर केस के मुख्य याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपने खून से पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने पत्र में लिखा कि शंकराचार्य हिंदुओं के लिए भगवान समान हैं और स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके चरण स्पर्श करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संतों के बीच जुबानी युद्ध का राजनीतिक दल लाभ उठा रहे हैं और माघ मेले में सामने आए वीडियो से यह स्पष्ट है कि साधु-संतों का अधिकारियों द्वारा अपमान किया गया।

@MUSKAN KUMARI

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Author: NCRLOCALDESK

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