भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में पुलिस कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्रीय मंत्री एवं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शुक्रवार को भरत भूषण तिवारी के पैतृक गांव पहुंचे। उन्होंने दिवंगत भरत भूषण तिवारी को श्रद्धांजलि अर्पित की, शोकाकुल परिजनों से मुलाकात की और उन्हें निष्पक्ष जांच तथा न्याय दिलाने का भरोसा दिया।
परिजनों से मुलाकात के बाद चिराग पासवान ने कहा कि आरा में बिहार पुलिस की कार्रवाई में भरत भूषण तिवारी की मौत अत्यंत दुखद और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का शासन सर्वोपरि होना चाहिए और यदि कानून लागू करने वाले अधिकारी ही कानून का उल्लंघन करेंगे तो आम लोगों का न्याय व्यवस्था से भरोसा कमजोर होगा।
उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि जांच में जो भी अधिकारी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ बिना किसी दबाव के सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि निर्दोष को न्याय दिलाना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।

इससे पहले गुरुवार को चिराग पासवान ने नई दिल्ली में से मुलाकात कर बिहार के राजगीर में पासवान समाज के दो युवकों की हत्या और भोजपुर में भरत भूषण तिवारी की मौत के मामले की जानकारी दी। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से दोनों मामलों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराने और पीड़ित परिवारों को जल्द न्याय दिलाने का आग्रह किया।
गौरतलब है कि भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की 23 जून को पुलिस कार्रवाई के दौरान गोली लगने से मौत हो गई थी। पुलिस का दावा है कि उन पर कई आपराधिक मामले दर्ज थे और गिरफ्तारी के दौरान उन्होंने पुलिस टीम पर फायरिंग की थी, जिसके जवाब में आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई में वह घायल हुए और बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
वहीं, परिजनों ने पुलिस के दावों को खारिज करते हुए इसे फर्जी एनकाउंटर बताया है। उनका आरोप है कि भरत भूषण तिवारी को पहले हिरासत में लिया गया और बाद में उनकी हत्या कर दी गई। इस मामले को लेकर विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने भी स्वतंत्र जांच की मांग की है।
मामले में कानूनी प्रक्रिया भी जारी है। परिजनों द्वारा दायर याचिका पर हाल ही में ने सीबीआई जांच के आदेश देने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को पहले संबंधित उच्च न्यायालय में उपलब्ध वैधानिक उपाय अपनाने की सलाह दी थी। अब चिराग पासवान के हस्तक्षेप के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।
@MUSKAN KUMARI





