Supreme Court of India ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अहम टिप्पणी करते हुए साफ कहा है कि Election Commission of India ने किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं किया है। कोर्ट ने कहा कि SIR प्रक्रिया पूरी तरह वैध है और चुनाव आयोग को संविधान तथा जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत ऐसा करने का अधिकार प्राप्त है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव केवल मतदान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मतदाता सूची की सटीकता, विश्वसनीयता और पारदर्शिता भी उतनी ही जरूरी है। अदालत ने माना कि SIR प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 21(3) के अनुरूप है।

सुप्रीम कोर्ट की 10 बड़ी बातें
•अदालत ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की जांच सीमित दायरे में और निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए।
•कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूरी SIR प्रक्रिया की न्यायिक समीक्षा संभव है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जांच कानून और प्रक्रियात्मक निष्पक्षता के दायरे में हो।
•यदि किसी व्यक्ति की दी गई जानकारी पर संदेह हो, तो चुनाव आयोग को नामांकन अस्वीकार करने या नाम हटाने की कार्रवाई शुरू करने का अधिकार है।
•अदालत ने कहा कि किसी नाम पर सवाल उठाने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं है।
•कोर्ट के मुताबिक SIR संविधान में “नई जान फूंकने” जैसा कदम है और इसका सीधा संबंध निष्पक्ष चुनाव से है।
•सुप्रीम कोर्ट ने माना कि तेजी से हो रहे शहरीकरण और प्रवासन के कारण मतदाता सूचियों का विशेष पुनरीक्षण जरूरी हो गया है।
•अदालत ने कहा कि जो प्रक्रिया शुरुआत में भेदभावपूर्ण लग सकती है, उसे उचित सुरक्षा उपायों के जरिए संवैधानिक रूप से वैध बनाया जा सकता है।
•कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आधार कार्ड SIR प्रक्रिया में मान्य दस्तावेज है।
•दस्तावेजों के वर्गीकरण को कोर्ट ने वैध माना और कहा कि इसका सीधा संबंध वोटर लिस्ट की अखंडता सुनिश्चित करने से है।
•सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIR प्रक्रिया को सिर्फ इसलिए अवैध नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि यह नियमित संशोधन प्रक्रिया के हर पहलू से पूरी तरह मेल नहीं खाती।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने यह भी सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के नियमों का उल्लंघन करती है। हालांकि अदालत अंततः इस निष्कर्ष पर पहुंची कि चुनाव आयोग की कार्रवाई वैधानिक और संवैधानिक ढांचे के भीतर है।
@MUSKAN KUMARI





