पटना: 30 जुलाई को होने वाले हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव ने अब रोमांचक मोड़ लेना शुरू कर दिया है। लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाने वाली बांकीपुर सीट एक बार फिर बिहार की सियासत के केंद्र में आ गई है।
नामांकन के अंतिम दिन भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा और जन सुराज के प्रशांत किशोर अपना नामांकन दाखिल करने जा रहे हैं। वहीं, तेज प्रताप यादव की पार्टी जनशक्ति जनता दल की महिला प्रत्याशी वीणा मानवी को नामांकन दाखिल करने के बाद धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इस घटनाक्रम ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है।
एक तरफ भाजपा के लिए अपने पुराने गढ़ को बचाने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ प्रशांत किशोर के लिए यह चुनाव बड़ी राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है। पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज एक भी सीट नहीं जीत सकी थी। ऐसे में बांकीपुर का यह मुकाबला पार्टी के राजनीतिक जनाधार की भी परीक्षा होगा।

इन सबके बीच राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (RLJP) के प्रत्याशी तनवीर आलम ने चुनावी मैदान में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। तनवीर आलम लगातार ढोल-नगाड़ों के साथ बांकीपुर की जनता के बीच पहुंचकर जनसंपर्क कर रहे हैं और समर्थन जुटाने में लगे हैं।
तनवीर आलम का चुनावी संदेश साफ है—“बांकीपुर में बदलाव की राजनीति होगी, धर्म और जाति की नहीं।” उनका दावा है कि इस बार चुनाव केवल बड़े राजनीतिक चेहरों या पारंपरिक समीकरणों का नहीं, बल्कि जनता के मुद्दों और बदलाव का होगा।

अब सवाल यह है कि क्या भाजपा अपने पुराने गढ़ को बचा पाएगी, क्या प्रशांत किशोर बांकीपुर से अपनी चुनावी ताकत साबित करेंगे, या फिर तनवीर आलम जनता के समर्थन के दम पर कोई बड़ा उलटफेर करेंगे? 30 जुलाई को होने वाला यह उपचुनाव बिहार की राजनीति में एक दिलचस्प मुकाबले की तस्वीर पेश कर रहा है।
@MUSKAN KUMARI






