पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: नियुक्ति नियमों में पूर्व प्रभाव से बदलाव नहीं, कृषि विश्वविद्यालय को निदेशक बहाल करने का आदेश

पटना। पटना हाईकोर्ट ने बिहार कृषि विश्वविद्यालय से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि वर्ष 2010 के अधिनियम के तहत हुई नियुक्ति प्रक्रिया में वर्ष 2017 में बनाए गए संशोधित नियमों को पूर्व प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति आलोक कुमार सिन्हा की एकलपीठ ने डॉ. रविन्द्र कुमार सोहन की याचिका पर सुनवाई करते हुए विश्वविद्यालय के आदेश को रद्द कर दिया।

 

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर ने वर्ष 2011 में निदेशक (प्रसार शिक्षा) पद पर सीधी भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। नियमित चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद 14 दिसंबर 2011 को उनकी इस पद पर नियुक्ति हुई थी। इससे पहले वे विश्वविद्यालय में कनिष्ठ वैज्ञानिक-सहायक प्राध्यापक, वरिष्ठ वैज्ञानिक-सह-एसोसिएट प्रोफेसर तथा विश्वविद्यालय प्रोफेसर-सह-मुख्य वैज्ञानिक जैसे पदों पर कार्य कर चुके थे।

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वर्ष 2017 में विश्वविद्यालय ने नया नियम लागू कर निदेशक पद का कार्यकाल पांच वर्ष निर्धारित कर दिया। इसी नियम का हवाला देते हुए वर्ष 2025 में विश्वविद्यालय ने डॉ. सोहन को पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा होने की बात कहकर निदेशक पद से हटाने और दूसरे पद पर भेजने का आदेश जारी किया, जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

 

विश्वविद्यालय की ओर से याचिका की सुनवाई पर आपत्ति जताते हुए कहा गया कि याचिकाकर्ता को पहले कुलाधिपति के समक्ष वैधानिक उपाय अपनाना चाहिए था। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि जब चुनौती कार्यालय आदेश को दी गई है, तब उसके आधार बने प्रबंधन बोर्ड के निर्णय को अलग से चुनौती देना आवश्यक नहीं है।

 

अदालत ने 19 सितंबर 2025 के कार्यालय आदेश को निरस्त करते हुए बिहार कृषि विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि दो महीने के भीतर डॉ. रविन्द्र कुमार सोहन को निदेशक (प्रसार शिक्षा) के पद पर बहाल किया जाए तथा उन्हें सभी देय सेवा लाभों का भुगतान किया जाए।

@MUSKAN KUMARI

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Author: NCRLOCALDESK

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