पटना हाईकोर्ट ने बिहार के संबद्ध डिग्री महाविद्यालयों के शिक्षकों के वेतन, बकाया राशि और पेंशन लाभ से जुड़े मामले में राज्य सरकार को 12 सप्ताह के भीतर अंतिम और तार्किक निर्णय लेने का निर्देश दिया है। जस्टिस हरीश कुमार की एकलपीठ ने संबद्ध डिग्री महाविद्यालय शिक्षक संघ समेत 89 रिट याचिकाओं की एक साथ सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि 30 अप्रैल 2025 को डिवीजन बेंच पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि डेफिसिट ग्रांट और ग्रांट अगेंस्ट परफॉर्मेंस प्राप्त करने वाले संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों के बीच अनुदान के आधार पर भेदभाव करना अनुचित और अवैध है। इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) को भी सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि 19 अप्रैल 2007 से पहले नियुक्त और विधिवत स्वीकृत सेवा वाले शिक्षकों को वेतन, बकाया भुगतान और सेवानिवृत्ति लाभ अन्य समान शिक्षकों की तरह दिए जाने चाहिए।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और विश्वविद्यालयों की ओर से बताया गया कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित 9 सदस्यीय समिति इस पूरे मामले की समीक्षा कर रही है और शिक्षकों का प्रतिवेदन उसके समक्ष लंबित है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ताओं के प्रतिवेदन पर 12 सप्ताह के भीतर विचार कर अंतिम निर्णय ले। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि शिक्षकों की शिकायत सही पाई जाती है तो इसी अवधि में आवश्यक आदेश भी जारी किए जाएं।
यह फैसला बिहार के संबद्ध डिग्री महाविद्यालयों के हजारों शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे उनके वेतन, बकाया राशि और पेंशन संबंधी मामलों के शीघ्र निस्तारण की उम्मीद बढ़ गई है।
@MUSKAN KUMARI






