आरा। दानापुर रेल मंडल में पटना जंक्शन के बाद सबसे अधिक राजस्व देने वाले प्रमुख स्टेशनों में शुमार आरा रेलवे जंक्शन की स्थिति रेलवे प्रशासन के दावों के विपरीत नजर आ रही है। करोड़ों रुपये का राजस्व देने वाला यह स्टेशन आज बुनियादी यात्री सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। भीषण गर्मी के बीच शुद्ध पेयजल की कमी, बंद पड़े नल और गंदगी से भरे बेसिन यात्रियों की परेशानी को बढ़ा रहे हैं।
रेलवे प्रशासन और जनप्रतिनिधि यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन स्टेशन की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। प्लेटफॉर्म पर लगे कई नल बंद पड़े हैं, जबकि कुछ स्थानों पर पानी की आपूर्ति बेहद कम है। जहां पानी उपलब्ध है, वहां गंदगी के कारण यात्री उसका उपयोग करने से बच रहे हैं।

गर्मी के इस मौसम में यात्रियों के सामने पेयजल की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। शुद्ध पानी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों को मजबूरन बाजार से महंगी बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर यात्रियों के लिए यह अतिरिक्त खर्च परेशानी का कारण बन रहा है। वहीं कुछ लोग मजबूरी में अस्वच्छ पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
स्थानीय यात्रियों का कहना है कि राजस्व के मामले में अव्वल रहने वाला आरा रेलवे जंक्शन सुविधाओं के मामले में काफी पीछे है। उनका आरोप है कि स्टेशन पर न तो पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था है और न ही साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक है। कई स्थानों पर जलापूर्ति केंद्रों और बेसिनों के आसपास गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका बनी हुई है।
यात्रियों का सवाल है कि जब आरा जंक्शन रेलवे को भारी राजस्व उपलब्ध करा रहा है, तो सुविधाओं के नाम पर इतनी लापरवाही क्यों बरती जा रही है। वहीं इस गंभीर समस्या पर रेलवे के जिम्मेदार अधिकारी खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या रेलवे के लिए राजस्व ही प्राथमिकता है और यात्रियों की मूलभूत सुविधाएं केवल कागजी दावों तक सीमित रह गई हैं।
@MUSKAN KUMARI






