बिहार में स्पीडी ट्रायल का असर: जुलाई में 3 को फांसी, 124 अभियुक्तों को उम्रकैद
बिहार में कानून का राज स्थापित करने और पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे स्पीडी ट्रायल अभियान के तहत जुलाई 2026 में बड़ी संख्या में अभियुक्तों को सजा दिलाई गई है। बिहार पुलिस मुख्यालय के अनुसार, जुलाई महीने में 3 अपराधियों को फांसी और 124 अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
पहला मामला रोहतास जिले के डिहरी नगर (डालमियानगर) थाना क्षेत्र का है। यहां 10 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के आरोपी बलराम सिंह उर्फ बलिराम सिंह को एडीजे-07, सासाराम की अदालत ने 10 जुलाई 2026 को फांसी की सजा सुनाई। इस मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज होने के महज 15 दिनों के भीतर आरोप पत्र दाखिल कर दिया था।
वहीं, दूसरा मामला मधुबनी जिले के घोघरडीहा थाना क्षेत्र का है। प्रेम प्रसंग के चलते दो मासूम बच्चों की हत्या कर उनके शव नदी में फेंकने के मामले में एक महिला और उसके सह-अभियुक्त जय प्रकाश मंडल को जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश (प्रथम), झंझारपुर की अदालत ने 2 जुलाई 2026 को फांसी की सजा सुनाई।
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जुलाई में 21 हजार से अधिक मामलों में दोषसिद्धि
बिहार पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में कुल 21,294 मामलों में दोषसिद्धि दर्ज की गई। इनमें आर्म्स एक्ट के 98, हत्या के 65, डकैती और लूट के 29, अपहरण के 22, दुष्कर्म एवं पॉक्सो के 71 तथा एनडीपीएस एक्ट के 42 मामले शामिल हैं।
जनवरी से जुलाई 2026 के बीच राज्य में कुल 86,027 मामलों में दोषसिद्धि दर्ज की जा चुकी है।
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जुलाई में सजा के आंकड़ों पर नजर डालें तो 3 को फांसी, 124 को आजीवन कारावास, 35 अभियुक्तों को 10 वर्ष या उससे अधिक और 204 अभियुक्तों को 10 वर्ष से कम की सजा सुनाई गई।
जून की तुलना में जुलाई में स्पीडी ट्रायल की रफ्तार में भी तेजी दर्ज की गई। जून में जहां आर्म्स एक्ट के 49 मामलों में सजा हुई थी, वहीं जुलाई में यह आंकड़ा बढ़कर 98 हो गया। इसी तरह आजीवन कारावास की सजा जून के 108 मामलों से बढ़कर जुलाई में 124 पहुंच गई।