नई दिल्ली, 22 अगस्त 2026
भारत में चीनी की कीमतों में अचानक आई तेजी ने आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ चीनी उद्योग और सरकार की चिंता भी बढ़ा दी है। पिछले एक महीने में ही औसत घरेलू चीनी कीमत करीब ₹48.18 प्रति किलो से बढ़कर ₹55.70 प्रति किलो पहुंच गई है। वहीं पिछले करीब दो महीनों में कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत तक की तेजी की रिपोर्ट सामने आई है।
बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार ने करीब एक दशक बाद 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। यह आयात 31 अक्टूबर 2026 तक किया जा सकेगा। सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों पर दबाव कम करना है।
क्या एथनॉल के लिए गन्ना डायवर्ट होने से चीनी महंगी हुई?
चीनी की कीमत बढ़ने के बीच सोशल मीडिया और कुछ चर्चाओं में यह दावा किया जा रहा है कि सरकार की एथनॉल नीति के कारण बड़ी मात्रा में गन्ना और चीनी एथनॉल उत्पादन की ओर डायवर्ट कर दी गई, जिसके कारण बाजार में चीनी की कमी पैदा हुई।
लेकिन उपलब्ध सरकारी आंकड़े इस दावे की पूरी तस्वीर कुछ अलग बताते हैं।
सरकार ने साफ किया है कि मौजूदा चीनी महंगाई का मुख्य कारण एथनॉल के लिए चीनी का डायवर्जन नहीं है। सरकार के अनुसार एथनॉल के लिए डायवर्ट होने वाली चीनी का हिस्सा पिछले वर्षों की तुलना में कम हुआ है। 2022-23 में यह हिस्सा लगभग 12 प्रतिशत था, जबकि 2025-26 में करीब 9 प्रतिशत बताया गया है।
हालांकि यह भी तथ्य है कि सरकार ने एथनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए चीनी उद्योग को प्रोत्साहित किया है। 2024-25 एथनॉल सप्लाई ईयर के लिए सरकार ने 40 लाख टन चीनी को एथनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट करने की अनुमति दी थी।
इसलिए एथनॉल और चीनी की उपलब्धता के बीच संबंध जरूर है, लेकिन यह कहना कि भारत में पूरा गन्ना एथनॉल के लिए भेज दिया गया और चीनी का उत्पादन बंद हो गया, उपलब्ध सरकारी आंकड़ों से साबित नहीं होता।
चीनी उत्पादन में आई बड़ी गिरावट
मौजूदा संकट की सबसे बड़ी वजहों में से एक इस साल चीनी उत्पादन में अनुमान से ज्यादा गिरावट है।
सरकार के ताजा अनुमान के अनुसार 2025-26 सीजन में भारत का चीनी उत्पादन लगभग 306 लाख टन रह सकता है। शुरुआती अनुमान करीब 343 लाख टन था। यानी अनुमान की तुलना में उत्पादन लगभग 11 प्रतिशत कम रहने की संभावना है।
महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में मौसम की परिस्थितियों और फसल में बीमारी से गन्ने की पैदावार प्रभावित होने की बात सामने आई है।
त्योहारी सीजन ने बढ़ाई चिंता
अगस्त से नवंबर के बीच देश में त्योहारों का सीजन होता है। गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली के दौरान मिठाई, बेकरी, पेय पदार्थ और खाद्य उद्योगों में चीनी की मांग बढ़ती है।
ऐसे समय में उत्पादन घटने और स्टॉक पर दबाव बढ़ने से कीमतों में तेजी और तेज हो सकती है। इसी कारण सरकार ने बाजार में उपलब्धता बनाए रखने के लिए आयात का फैसला किया है।
सरकार ने थोक खरीदारों पर भी लगाई स्टॉक सीमा
चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने थोक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा भी कड़ी की है।
1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक ऐसे bulk consumers, जिनकी मासिक खपत 10 टन से अधिक है, वे अधिकतम 15 दिन की जरूरत के बराबर चीनी का स्टॉक रख सकेंगे।
एथनॉल नीति का दूसरा पहलू
भारत ने पेट्रोल में एथनॉल मिलाने का लक्ष्य तेजी से बढ़ाया है। सरकार के अनुसार 2025-26 में 20 प्रतिशत एथनॉल ब्लेंडिंग हासिल करने की दिशा में देश आगे बढ़ा है।
एथनॉल के लिए केवल गन्ना ही स्रोत नहीं है। सरकार ने अनाज, विशेषकर मक्का, से भी एथनॉल उत्पादन को बढ़ावा दिया है। हालिया सरकारी जानकारी के अनुसार देश में उत्पादित एथनॉल का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज से आता है।
इसका मतलब है कि एथनॉल नीति ने चीनी उद्योग की अर्थव्यवस्था को जरूर बदला है, लेकिन वर्तमान चीनी संकट को सिर्फ एथनॉल के खाते में डालना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
सबसे बड़ा सवाल: अगर चीनी की कमी नहीं है तो आयात क्यों?
यही इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है।
सरकार का कहना है कि मौजूदा उत्पादन अनुमान घटने, स्टॉक कम होने और त्योहारी मांग बढ़ने की आशंका के कारण पहले से कदम उठाना जरूरी है। इसलिए 10 लाख टन कच्ची चीनी का शुल्क-मुक्त आयात किया जा रहा है।
यानी फिलहाल तस्वीर यह है:
कम उत्पादन + मौसम/बीमारी का असर + कम होता स्टॉक + त्योहारी मांग + बाजार की चिंता = चीनी की कीमत में तेज उछाल।
एथनॉल डायवर्जन इस पूरे सिस्टम का एक हिस्सा है, लेकिन मौजूदा कीमत वृद्धि का अकेला कारण नहीं।
फैक्ट चेक
दावा: “सारा गन्ना एथनॉल के लिए भेज दिया गया और चीनी बनना बंद हो गई।”
फैक्ट: ❌ सही नहीं।
दावा: “गन्ने/चीनी का एक हिस्सा एथनॉल के लिए डायवर्ट किया जाता है।”
फैक्ट: ✅ सही।
दावा: “इस साल भारत में चीनी उत्पादन अनुमान से कम हुआ।”
फैक्ट: ✅ सही।
दावा: “चीनी की कीमत बढ़ने के बाद सरकार ने आयात की अनुमति दी।”
फैक्ट: ✅ सही—10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी गई है।
निष्कर्ष: भारत में चीनी की मौजूदा महंगाई को समझने के लिए केवल एथनॉल नीति को जिम्मेदार ठहराना अधूरा विश्लेषण होगा। उत्पादन में गिरावट और आने वाले त्योहारी सीजन की मांग इस समय सबसे प्रमुख कारक दिखाई देते हैं। साथ ही, एथनॉल नीति के कारण चीनी उद्योग में गन्ने के इस्तेमाल का संतुलन जरूर बदला है—जिस पर भविष्य में सरकार को खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा दोनों के बीच संतुलन बनाना होगा।
स्रोत: भारत सरकार/PIB, उपभोक्ता मामले एवं खाद्य मंत्रालय, Reuters और अन्य उपलब्ध ताजा रिपोर्टें।
Author: Noida Desk
मुख्य संपादक (Editor in Chief)






