बिहार में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार बनने और सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद प्रशासनिक कार्यक्रमों के स्वरूप में भी बदलाव दिखाई देने लगा है। सबसे अधिक चर्चा मुख्यमंत्री की जनसुनवाई व्यवस्था के बोर्ड को लेकर है, जिसका प्रमुख रंग नीले से बदलकर भगवा कर दिया गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में ‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री’ कार्यक्रम आयोजित किया जाता था, जिसकी पहचान नीले रंग के मंच और आधिकारिक बोर्ड से जुड़ी थी। नई सरकार ने इस व्यवस्था का नाम बदलकर ‘राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम’ कर दिया है। इसके साथ कार्यक्रम की डिजाइन और रंग में भी बदलाव किया गया है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अनुसार, प्रत्येक महीने के दूसरे मंगलवार को यह कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें मुख्यमंत्री सीधे लोगों की समस्याएं सुनेंगे और संबंधित अधिकारियों को समाधान के निर्देश देंगे। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य शिकायतों का त्वरित और पारदर्शी समाधान सुनिश्चित करना है।

भगवा रंग को भारतीय परंपरा में त्याग, साहस और राष्ट्रसेवा का प्रतीक माना जाता है। यह भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पहचान से भी जुड़ा रहा है। ऐसे में सरकारी कार्यक्रम के बोर्ड में भगवा रंग की प्रमुखता को लेकर राजनीतिक चर्चा भी शुरू हो गई है। समर्थक इसे सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हैं, जबकि विपक्षी दृष्टिकोण में ऐसे बदलावों को राजनीतिक ब्रांडिंग के रूप में देखा जाता है।
सरकार की ओर से इसे नई ब्रांडिंग और जनसहभागिता को मजबूत करने की पहल बताया जा रहा है। अब यह ‘राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम’ जनता और प्रशासन के बीच सीधे संवाद के नए माध्यम के रूप में काम करेगा।
@MUSKAN KUMARI





