बांकीपुर उपचुनाव बना प्रतिष्ठा की लड़ाई, 30 साल पुराने भाजपा के गढ़ पर टिकी पूरे देश की नजर

बिहार की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल बांकीपुर में 30 जुलाई को होने वाला उपचुनाव अब भाजपा और जन सुराज के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। एक ओर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की राजनीतिक विरासत दांव पर है, तो दूसरी ओर जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पहली बार खुद चुनावी मैदान में उतरकर अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता की परीक्षा दे रहे हैं।

नितिन नवीन के राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद खाली हुई इस सीट पर भाजपा का करीब तीन दशकों से दबदबा रहा है। नितिन नवीन लगातार पांच बार यहां से विधायक चुने गए। ऐसे में भाजपा के सामने अपने मजबूत शहरी गढ़ को बचाने की चुनौती है।

प्रशांत किशोर के लिए बांकीपुर का चुनावी इतिहास भी बड़ी चुनौती है। 2020 में हाई-प्रोफाइल उम्मीदवार पुष्पम प्रिया चौधरी को यहां सिर्फ 5,189 वोट मिले थे और उनकी जमानत जब्त हो गई थी। वहीं, 2025 के विधानसभा चुनाव में भी जन सुराज की उम्मीदवार वंदना कुमारी को केवल 7,717 वोट मिले, जबकि भाजपा के नितिन नवीन ने 98,299 वोट हासिल किए थे।

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बांकीपुर का राजनीतिक इतिहास भी बेहद महत्वपूर्ण रहा है। इस सीट ने कृष्ण बल्लभ सहाय और महामाया प्रसाद सिन्हा जैसे दो मुख्यमंत्री दिए हैं। 1995 के बाद से यह सीट भाजपा का मजबूत गढ़ बन गई।

अब सवाल यह है कि क्या प्रशांत किशोर अपनी राष्ट्रीय पहचान को वोटों में बदलकर भाजपा के तीन दशक पुराने किले में सेंध लगा पाएंगे, या बांकीपुर एक बार फिर भाजपा के साथ खड़ा रहेगा? 30 जुलाई का उपचुनाव दोनों पक्षों की राजनीतिक ताकत और भविष्य की दिशा तय करने वाली बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।

@MUSKAN KUMARI

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Author: NCRLOCALDESK

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