पटना: बिहार के उच्च शिक्षा क्षेत्र से बड़ी खबर सामने आई है। राज्यपाल सह कुलाधिपति ने ‘बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976’ और ‘पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976’ के तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए 4-वर्षीय सीबीसीएस (Choice Based Credit System) स्नातक पाठ्यक्रम से संबंधित संशोधित अध्यादेश (Ordinance) और रेगुलेशंस को मंजूरी दे दी है।
राज्यपाल सचिवालय द्वारा जारी पत्र संख्या L/ORD./03/2026-1416/GS(I) के अनुसार, यह संशोधन मुख्य रूप से स्नातक पाठ्यक्रमों की अवधि (Programme Duration) और एग्जिट विकल्पों (Exit Options) से जुड़े प्रावधानों में किया गया है। यह बदलाव पूर्व में 15 मई 2023 को जारी अधिसूचना के कुछ प्रावधानों में संशोधन के रूप में लागू किया गया है।

अधिसूचना के मुताबिक, संशोधित नियम 4 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गए हैं। इसके तहत छात्रों को 4-वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम में एग्जिट विकल्पों से जुड़े नए प्रावधानों का लाभ मिलेगा, जो नई शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप अधिक लचीली शिक्षा व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हालांकि, इस संशोधित अध्यादेश को फिलहाल पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय और मौलाना मजहरुल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय पर लागू नहीं किया गया है। राज्यपाल के अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह द्वारा जारी आदेश में इन दोनों विश्वविद्यालयों को इस संशोधन से फिलहाल बाहर रखा गया है। इसके पीछे के प्रशासनिक या तकनीकी कारणों की आधिकारिक जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप और अधिक लचीला तथा छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। राज्यपाल सचिवालय ने संबंधित विभागों और विश्वविद्यालयों को आवश्यक कार्रवाई के लिए अधिसूचना भेज दी है।
@MUSKAN KUMARI





