बिहार के शिवहर समाहरणालय में एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। आरोप है कि विधि प्रशाखा में तैनात एक डाटा एंट्री ऑपरेटर ने जिलाधिकारी प्रतिभा रानी के फर्जी हस्ताक्षर कर सरकारी पत्र जारी कर दिया। मामले का खुलासा तब हुआ जब सुनवाई के दौरान खुद जिलाधिकारी की नजर संबंधित दस्तावेज पर पड़ी और उन्हें हस्ताक्षर संदिग्ध लगे।
जानकारी के अनुसार, जिलाधिकारी प्रतिभा रानी अनुज्ञप्ति वाद संख्या 188/2026 (विकास पासवान बनाम बिहार सरकार) की सुनवाई कर रही थीं। इसी दौरान उनके समक्ष रखे गए एक पत्र पर किए गए हस्ताक्षर पर उन्हें संदेह हुआ। जब हस्ताक्षर का मिलान किया गया तो पता चला कि वह जिलाधिकारी के नहीं, बल्कि फर्जी तरीके से किए गए थे।
आरोप है कि विधि प्रशाखा में कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटर घनश्याम मुरारी ने जिलाधिकारी के हस्ताक्षर की नकल कर एसडीओ पुरनहिया, अंचलाधिकारी और एमओ को प्रतिवेदन भेजने संबंधी निर्देशात्मक पत्र जारी कर दिया। यह पूरा पत्र जिलाधिकारी की जानकारी और अनुमति के बिना जारी किया गया था।

मामले का खुलासा होते ही जिलाधिकारी ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उनके आदेश पर विधि प्रशाखा के लिपिक शुभम सिन्हा ने नगर थाना में डाटा एंट्री ऑपरेटर घनश्याम मुरारी समेत संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। साथ ही घनश्याम मुरारी का अनुबंध तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है, जबकि प्रधान लिपिक से स्पष्टीकरण मांगते हुए विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।
प्रशासन अब इस पूरे मामले की गहन जांच कर रहा है कि फर्जी हस्ताक्षर किस उद्देश्य से किए गए और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क या साजिश है। जिलाधिकारी प्रतिभा रानी ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा है कि दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।
@MUSKAN KUMARI





