सीवान: बिहार के सीवान जिले में समेकित बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) की हालिया तबादला-पोस्टिंग सूची ने प्रशासनिक पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि सरकार के उस नियम की अनदेखी की गई, जिसके अनुसार किसी भी अधिकारी या कर्मी को तीन वर्ष से अधिक समय तक एक ही स्थान पर नहीं रखा जाना चाहिए। इसके बावजूद कई कर्मियों को वर्षों से एक ही क्षेत्र में बनाए रखने के साथ-साथ दोबारा वहीं पदस्थापित या अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया।
जिला पदाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय के हस्ताक्षर से जारी आदेश संख्या 797 और 799 (27 जून 2026) के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है। विभागीय हलकों में चर्चा है कि तबादला प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह गई और नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
आदेश के अनुसार, क्लर्क प्रियरंजन गिरी, जो करीब पांच वर्षों से जिला प्रोग्राम कार्यालय में कार्यरत थे और अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे, उन्हें एक बार फिर उसी कार्यालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया। वहीं सांख्यिकी सहायक जय प्रकाश प्रसाद, जो लगभग सात वर्षों से लकड़ी नबीगंज और गोरेयाकोठी में पदस्थापित एवं अतिरिक्त प्रभार में रहे, उन्हें फिर लकड़ी नबीगंज में पदस्थापित करते हुए गोरेयाकोठी का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया। इसी तरह श्याम सुंदर सिंह को भी दोबारा जिला प्रोग्राम कार्यालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया।

सबसे ज्यादा चर्चा सांख्यिकी सहायक शिवपुकार यादव की पोस्टिंग को लेकर है। विभागीय अभिलेखों के अनुसार उनकी वर्ष 2012 में हुसैनगंज में पदस्थापना हुई थी। इसके बाद नियमित पदस्थापन और अतिरिक्त प्रभार के जरिए वे करीब 14 वर्षों तक उसी क्षेत्र से जुड़े रहे। वर्ष 2022 में उनका स्थानांतरण आंदर किया गया, लेकिन हुसैनगंज का अतिरिक्त प्रभार उनके पास ही बना रहा। अब नए आदेश में उन्हें फिर हुसैनगंज में पदस्थापित करते हुए आंदर का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जिले के 19 प्रखंडों के बावजूद एक ही कर्मी को लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में क्यों रखा गया।
सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि तबादला सूची जारी होने से पहले मनचाही पोस्टिंग को लेकर विभाग के भीतर लंबी कवायद और मोलभाव हुआ। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि जांच में ऐसे आरोप सही पाए जाते हैं, तो पूरी तबादला प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं।

इस पूरे मामले में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी तरणी कुमारी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि स्थानांतरण प्रस्ताव तैयार करते समय वास्तविक पदस्थापन और अतिरिक्त प्रभार का पूरा विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया। हालांकि, इस संबंध में उनका पक्ष सामने नहीं आ सका। उनसे कार्यालय और सरकारी मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।
नोट: इस रिपोर्ट में उल्लिखित आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति संबंधित अधिकारियों के जवाब और विभागीय जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
@MUSKAN KUMARI





