सरकारी गलियारों में इन दिनों एक दिलचस्प चर्चा जोरों पर है। चर्चा ऐसे एक अधिकारी की, जिनके पास जिम्मेदारियां मानो खुद चलकर पहुंच रही हैं। जहां कई अधिकारी अतिरिक्त प्रभार या महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी मिलने का वर्षों तक इंतजार करते हैं, वहीं एक साहेब ऐसे हैं जिनके हिस्से लगातार नए-नए दायित्व आते जा रहे हैं।
प्रशासनिक महकमे में लंबे समय से विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे इस अधिकारी के पास पहले से ही कई महत्वपूर्ण प्रभार रहे हैं। कभी एनडीसी, कभी डीएसओ, कभी आपदा शाखा और कुछ समय पहले तक डीएलओ का अतिरिक्त दायित्व भी उनके पास था। ऐसे में विभागीय हलकों में यह चर्चा आम है कि क्या प्रशासनिक व्यवस्था में “वन मैन आर्मी” का कोई नया मॉडल विकसित हो रहा है।
इसी बीच परिवहन विभाग के हालिया आदेश ने इन चर्चाओं को और बल दे दिया है। जारी आदेश के अनुसार, बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी विजयंत, जो वर्तमान में खगड़िया के जिला परिवहन पदाधिकारी हैं, उन्हें अपने मौजूदा कार्यों के अतिरिक्त भागलपुर के जिला परिवहन पदाधिकारी का भी अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
खगड़िया और भागलपुर के बीच करीब 100 किलोमीटर की दूरी है, लेकिन विभाग ने दोनों जिलों की जिम्मेदारी एक ही अधिकारी को सौंपने का फैसला किया है। इसके बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।

लोगों के बीच चर्चा है कि क्या परिवहन विभाग में अधिकारियों की कमी के कारण ऐसा निर्णय लिया गया है या फिर यह किसी विशेष भरोसे और कार्यकुशलता का परिणाम है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि लगातार मिल रही अतिरिक्त जिम्मेदारियां संबंधित अधिकारी की प्रशासनिक क्षमता और विभाग के विश्वास को दर्शाती हैं।
दिलचस्प बात यह भी है कि जहां कई अधिकारी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के लिए लंबे समय तक इंतजार करते हैं, वहीं यहां स्थिति बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है। ऐसे में यह बहस तेज हो गई है कि यह महज प्रशासनिक आवश्यकता है, कार्यकुशलता का प्रमाण है या फिर इसके पीछे कोई और समीकरण काम कर रहे हैं।
फिलहाल, विभागीय आदेश के बाद एक बात जरूर स्पष्ट है कि प्रशासनिक हलकों में इन अतिरिक्त प्रभारों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। अब समय और परिस्थितियां ही तय करेंगी कि यह फैसला प्रशासनिक मजबूरी था या किसी विशेष भरोसे का प्रतीक।
@MUSKAN KUMARI





