राष्ट्रीय उच्च पथों (NH) पर बढ़ते अतिक्रमण, अनधिकृत पार्किंग और असुरक्षित व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए बिहार सरकार ने बड़ा अभियान शुरू करने का फैसला लिया है। बुधवार को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में बिहार सड़क सुरक्षा परिषद की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें परिवहन, पथ निर्माण, एनएचएआई, नगर विकास विभाग और पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
यह कार्रवाई नवंबर 2025 में राजस्थान के फलोदी और तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले में राष्ट्रीय राजमार्गों पर अतिक्रमण और अवैध पार्किंग के कारण हुई भीषण सड़क दुर्घटनाओं के बाद की जा रही है। उन हादसों में 34 लोगों की मौत हुई थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सभी राज्यों को हाईवे को अतिक्रमण मुक्त और सुरक्षित बनाने के निर्देश दिए थे।
सरकार ने अब राष्ट्रीय उच्च पथों के ‘राइट ऑफ वे’ क्षेत्र में भारी और व्यावसायिक वाहनों की अनधिकृत पार्किंग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। केवल निर्धारित ट्रक ले-बाय और वे-साइड अमेनिटी स्थलों पर ही पार्किंग की अनुमति होगी।

इसके साथ ही सरकार ने हाईवे के राइट ऑफ वे क्षेत्र में बने सभी अवैध ढाबों, होटलों और अन्य व्यावसायिक निर्माणों को हटाने के लिए 20 दिनों का अल्टीमेटम जारी किया है। तय समय के भीतर अतिक्रमण नहीं हटाने पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित ‘डिस्ट्रिक्ट हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स’ बुलडोजर कार्रवाई करेगी। इस अभियान में जिला प्रशासन, पुलिस, एनएचएआई और स्थानीय निकाय संयुक्त रूप से कार्रवाई करेंगे।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में हाईवे किनारे किसी भी नए ढाबे, होटल या व्यावसायिक निर्माण के लिए एनएचएआई या पथ निर्माण विभाग से एनओसी लेना अनिवार्य होगा। वहीं पुराने प्रतिष्ठानों को अपने खर्च पर वैकल्पिक पहुंच मार्ग बनाना होगा, अन्यथा उनके खिलाफ ‘कंट्रोल ऑफ नेशनल हाईवे एक्ट 2002’ के तहत कार्रवाई की जाएगी।
सड़क सुरक्षा को जनभागीदारी से जोड़ते हुए सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे हाईवे पर अतिक्रमण या अवैध पार्किंग की सूचना टोल-फ्री नंबर 1033 और ‘राजमार्ग यात्रा’ ऐप के जरिए दें। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और मानव जीवन की सुरक्षा के लिए सभी को इन दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।
@MUSKAN KUMARI






