काठमांडू। भारत और नेपाल के बीच कोसी एवं गंडक परियोजनाओं को लेकर संयुक्त समिति (JCKGP) की 11वीं बैठक सकारात्मक माहौल में संपन्न हुई। दो दिनों तक चली इस बैठक में दोनों देशों ने लंबे समय से लंबित कई तकनीकी और प्रशासनिक मुद्दों पर सहमति बनाई।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व बिहार जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल ने किया, जबकि नेपाल की ओर से जलश्रोत एवं सिंचाई विभाग के महानिदेशक मित्र बराल मौजूद रहे। बैठक में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक में पश्चिमी कोशी मुख्य नहर के नेपाल क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने, तटबंधों और बराज क्षेत्रों में बाधाओं को हटाने तथा बिजली के खंभों को स्थानांतरित करने जैसे अहम फैसलों पर सहमति बनी। इससे नहरों के संचालन और रखरखाव में आने वाली समस्याओं को दूर करने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा वीरपुर क्षेत्र में बाढ़ से पहले कटाव निरोधक कार्यों के लिए जरूरी संसाधनों के निर्बाध आवागमन पर भी दोनों पक्ष सहमत हुए। सीमांकन के लिए GPS तकनीक और सैटेलाइट इमेजरी साझा करने पर बनी सहमति को पारदर्शिता और बेहतर समन्वय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कोसी बराज क्षेत्र में बढ़ती स्थानीय गतिविधियों और उससे उत्पन्न बाधाओं को लेकर नेपाली पक्ष ने नियंत्रण का भरोसा दिया। साथ ही स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे टैक्स को समझौते के खिलाफ बताते हुए उसे समाप्त करने का आश्वासन भी दिया गया।
बैठक में मानसून और बाढ़ प्रबंधन को लेकर डेटा साझा करने तथा संयुक्त निरीक्षण की रणनीति पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों का मानना है कि यह पहल दोनों देशों के बीच सहयोग और आपसी विश्वास को और मजबूत करेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बैठक केवल तकनीकी समस्याओं के समाधान तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत-नेपाल संबंधों में समन्वय और साझेदारी को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है।
@MUSKAN KUMARI






