डीजीपी का जीरो टॉलरेंस आदेश, केस दर्ज करने में आनाकानी पर होगी कार्रवाई
पटना:
बिहार पुलिस के महानिदेशक विनय कुमार ने राज्य के सभी थानों को ‘Zero FIR’ को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब किसी भी व्यक्ति के साथ अपराध होने पर वह नजदीकी किसी भी थाने में जाकर मामला दर्ज करा सकता है। थानेदार क्षेत्राधिकार का हवाला देकर शिकायत दर्ज करने से इनकार नहीं कर सकेंगे।
पुलिस मुख्यालय ने इस व्यवस्था को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई है और स्पष्ट किया है कि लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह व्यवस्था भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173 के तहत लागू की गई है, जिसका उद्देश्य पीड़ितों को बिना देरी न्याय दिलाना है।
SOP जारी, तुरंत दर्ज होगी शिकायत
नई व्यवस्था के तहत पुलिस मुख्यालय ने विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी जारी की है। निर्देश के अनुसार, किसी भी थाने में क्षेत्राधिकार से बाहर की घटना की सूचना मिलने पर उसे तत्काल दर्ज करना अनिवार्य होगा। इसी प्रक्रिया को ‘Zero FIR’ कहा जाता है।
मौखिक और डिजिटल दोनों माध्यम मान्य
डीजीपी के आदेश के मुताबिक, शिकायत मौखिक या डिजिटल किसी भी माध्यम से दी जा सकती है। मौखिक शिकायत को लिखित रूप में दर्ज कर शिकायतकर्ता को पढ़कर सुनाया जाएगा और हस्ताक्षर लिए जाएंगे। वहीं, ऑनलाइन या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दी गई शिकायत पर तीन दिनों के भीतर हस्ताक्षर करना जरूरी होगा।
सीसीटीएनएस के जरिए होगा ट्रांसफर
नई व्यवस्था में जीरो एफआईआर को अधिसूचित प्रपत्र में दर्ज किया जाएगा और स्टेशन डायरी में भी इसका उल्लेख अनिवार्य होगा। इसके बाद मामला संबंधित थाने को सीसीटीएनएस के माध्यम से तुरंत ट्रांसफर किया जाएगा। जिन थानों में यह सुविधा नहीं है, वहां से रजिस्टर्ड डाक के जरिए केस भेजा जाएगा।
हर थाने और एसपी कार्यालय में जीरो एफआईआर के लिए अलग रजिस्टर रखा जाएगा, जिसकी नियमित समीक्षा होगी। अंचल निरीक्षक, एसडीपीओ, एसपी, आईजी और डीआईजी स्तर पर समय-समय पर इसकी जांच की जाएगी।
महिलाओं और दिव्यांगों के लिए विशेष व्यवस्था
नई व्यवस्था में महिलाओं और दिव्यांग पीड़ितों के लिए विशेष प्रावधान भी किए गए हैं। महिलाओं की शिकायत महिला पुलिस अधिकारी द्वारा दर्ज की जाएगी, जबकि मानसिक या शारीरिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों की शिकायत उनके घर जाकर दर्ज करने की व्यवस्था की गई है।
पुलिस मुख्यालय के इस फैसले से राज्य में अपराध दर्ज करने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, संवेदनशील और त्वरित होने की उम्मीद जताई जा रही है।
@MUSKAN KUMARI





