बिहार में निगरानी ब्यूरो का अलग कैडर खत्म, सरकार के फैसले से सियासी हलचल तेज

प्रशासनिक सुधार या नियंत्रण बढ़ाने की रणनीति? फैसले पर उठने लगे सवाल

बिहार सरकार के एक बड़े प्रशासनिक फैसले ने सियासी और नौकरशाही गलियारों में हलचल तेज कर दी है। राज्य सरकार ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अलग संवर्ग यानी अलग कैडर को समाप्त करने का निर्णय लिया है। सरकार इसे पुलिस व्यवस्था में एकरूपता और प्रशासनिक सुधार की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है, जबकि विपक्ष और राजनीतिक जानकार इसे सत्ता के केंद्रीकरण से जोड़कर देख रहे हैं।

सरकारी आदेश के मुताबिक अब बिहार निगरानी अन्वेषण संवर्ग पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। अब तक अलग कैडर में कार्यरत DSP, पुलिस निरीक्षक और पुलिस अवर निरीक्षक सीधे बिहार पुलिस सेवा के अधीन माने जाएंगे। इन अधिकारियों को बिहार पुलिस के समकक्ष पदों में समायोजित किया जाएगा।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस बदलाव का असर अधिकारियों की सेवा शर्तों, सीनियरिटी, प्रमोशन या अनुभव पर नहीं पड़ेगा। उनकी सेवा को नियमित सेवा के रूप में ही मान्यता मिलेगी। आदेश के अनुसार निगरानी ब्यूरो के DSP को उनकी पहली नियुक्ति की तारीख से बिहार पुलिस सेवा में समायोजित किया जाएगा। वहीं निरीक्षक और अवर निरीक्षक स्तर के अधिकारियों, विशेष रूप से 2014 और 2023 बैच के कर्मियों को भी समकक्ष पदों पर शामिल किया जाएगा।

 

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अब तक निगरानी अन्वेषण ब्यूरो का अपना अलग ढांचा और स्वतंत्र संवर्ग था, जिसके कारण उसकी कार्यप्रणाली अपेक्षाकृत स्वायत्त मानी जाती थी। लेकिन नए फैसले के बाद यह पूरा तंत्र गृह विभाग के अधीन बिहार पुलिस सेवा का हिस्सा बन जाएगा।

सत्ता पक्ष का दावा है कि इस कदम से ट्रांसफर-पोस्टिंग, प्रशासनिक नियंत्रण और कैडर प्रबंधन अधिक सरल और पारदर्शी होगा। लंबे समय से पुलिस व्यवस्था में समानता लाने और संवर्गों की जटिलता खत्म करने की चर्चा चल रही थी, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया।

हालांकि इस फैसले को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने वाली एजेंसी की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। विपक्ष यह सवाल उठा रहा है कि क्या सरकार निगरानी ब्यूरो को पूरी तरह पुलिस सिस्टम में समाहित कर उस पर ज्यादा नियंत्रण स्थापित करना चाहती है।

दरअसल हाल के महीनों में निगरानी ब्यूरो और विशेष निगरानी इकाई ने कई अधिकारियों और सरकारी कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। ऐसे में इस फैसले को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। हालांकि सरकार लगातार यह भरोसा दिला रही है कि भ्रष्टाचार विरोधी अभियान पहले की तरह जारी रहेगा और ट्रैप, जांच व केस दर्ज करने की प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि यह प्रशासनिक पुनर्गठन जमीन पर कितना असर दिखाता है। क्या इससे पुलिस व्यवस्था और मजबूत होगी या फिर विपक्ष के आरोपों के मुताबिक सत्ता का नियंत्रण और गहरा होगा, यह आने वाले दिनों में साफ हो सकेगा।

@MUSKAN KUMARI

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Author: NCRLOCALDESK

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