केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के जनसंख्या गणना चरण के लिए शुक्रवार, 14 अगस्त को 40 सवालों की सूची जारी कर दी। इस बार जनगणना में जाति से जुड़ा सवाल भी शामिल किया गया है, जो स्वतंत्र भारत में पहली बार होगा। देश में आखिरी बार जातीय गणना 1931 में हुई थी।
2011 की जनगणना में 29 सवाल पूछे गए थे, जबकि इस बार इनकी संख्या बढ़ाकर 40 कर दी गई है। नए सवालों में कोरोना वैक्सीन की खुराक लेने का स्थान, बैंक खातों की संख्या, डिजिटल साक्षरता, घोषित राष्ट्रीयता और जीवनसाथी का नाम जैसी जानकारियां शामिल हैं। उपलब्ध होने पर मोबाइल नंबर, आधार, वोटर आईडी और पासपोर्ट नंबर भी दर्ज किया जाएगा।
जाति बताने के लिए नहीं होगी तैयार सूची
जाति से जुड़े सवाल में किसी तरह की पूर्व निर्धारित जाति सूची नहीं होगी। जवाबदाता अपनी जाति जिस नाम से बताएगा, उसे उसी रूप में दर्ज किया जाएगा। गणनाकर्मी अपनी ओर से उसे किसी जाति या उपजाति की श्रेणी में वर्गीकृत नहीं करेंगे।
यह प्रक्रिया 2011 की सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना जैसी होगी। उस दौरान बड़ी संख्या में अलग-अलग जाति नाम सामने आए थे, जिससे आंकड़ों के इस्तेमाल को लेकर मुश्किलें आई थीं।

कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि उम्मीद थी कि जाति गणना के लिए राज्यों के अनुसार पहले से तैयार सूची होगी, जैसा बिहार और तेलंगाना में किया गया था। उन्होंने सूची नहीं होने पर सरकार की मंशा को लेकर सवाल उठाए।
रोजगार, पलायन और परिवार से जुड़े सवाल
जनगणना में रोजगार, आर्थिक गतिविधि, पेशे, उद्योग और कामगार की श्रेणी से संबंधित जानकारी भी ली जाएगी। इसके अलावा जन्म स्थान, पिछला निवास, पलायन का कारण और अंतिम पलायन के बाद गांव या शहर में रहने की अवधि भी पूछी जाएगी।
महिलाओं से जीवित बच्चों की संख्या, मौजूदा विवाह से हुए बच्चों और पिछले एक साल में हुए जीवित जन्मों की जानकारी भी ली जाएगी।
जनगणना का स्व-गणना (Self Enumeration) चरण 17 अगस्त से शुरू होगा। लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फबारी वाले क्षेत्रों में जनसंख्या गणना 1 से 30 सितंबर के बीच होगी, जबकि देश के बाकी हिस्सों में यह प्रक्रिया फरवरी 2027 में आयोजित की जाएगी।
@MUSKAN KUMARI






