पटना: केंद्र सरकार की ओर से जारी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) 2.0 रिपोर्ट में बिहार ने स्कूली शिक्षा के प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। सीखने के परिणाम (Learning Outcomes) के मामले में बिहार का प्रदर्शन कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात और उत्तराखंड जैसे राज्यों से बेहतर रहा है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राज्य को स्कूलों के बुनियादी ढांचे और सुविधाओं में अभी काफी सुधार की जरूरत है।
शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा जारी शैक्षणिक सत्र 2025-26 की पीजीआई 2.0 रिपोर्ट में बिहार को ‘आकांक्षी-1’ ग्रेड मिला है। राज्य ने 1,000 में 564.8 अंक हासिल किए हैं, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 507 अंक था। इससे राज्य के समग्र प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार, बिहार की सबसे बड़ी उपलब्धि ‘समानता (Equity)’ के क्षेत्र में रही, जहां राज्य ने 260 में 221.5 अंक हासिल कर ‘उत्तम-1’ ग्रेड प्राप्त किया। वहीं ‘शिक्षा तक पहुंच’ में 80 में 54.7 अंक और ‘शिक्षक शिक्षा एवं प्रशिक्षण’ में 100 में 67 अंक मिले, जिसके लिए राज्य को ‘उत्तम-3’ ग्रेड दिया गया।
लर्निंग आउटकम श्रेणी में बिहार को 240 में 81.9 अंक मिले और ‘प्रचेष्टा-3’ ग्रेड प्राप्त हुआ। रिपोर्ट में कहा गया कि कक्षा 3, 6 और 9 के विद्यार्थियों की भाषा और गणित की बुनियादी दक्षता में अभी और सुधार की आवश्यकता है, लेकिन इसके बावजूद इस श्रेणी में बिहार कई विकसित राज्यों से आगे रहा।

हालांकि, ‘इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं सुविधाएं’ बिहार की सबसे बड़ी कमजोरी बनी हुई हैं। इस श्रेणी में राज्य को 190 में केवल 64.8 अंक मिले। रिपोर्ट के मुताबिक, कई स्कूलों में आईसीटी लैब, स्मार्ट क्लासरूम, पुस्तकालय, खेल सुविधाएं और दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए आवश्यक संसाधनों की कमी है।
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार सीखने के परिणामों में सुधार से उत्साहित है। उन्होंने बताया कि बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अन्य राज्यों की बेहतर व्यवस्थाओं का अध्ययन कराया जाएगा, ताकि बिहार की शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा सके
@MUSKAN KUMARI





