पटना। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के सिंगापुर से लौटने के बाद परिवार के भीतर चल रहे मतभेदों के खत्म होने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने इन चर्चाओं को और तेज कर दिया है। रोहिणी आचार्य की ताजा टिप्पणियों ने परिवार के अंदर जारी असहजता और राजनीतिक खींचतान को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
रोहिणी आचार्य ने तेजस्वी यादव के करीबी माने जाने वाले संजय यादव पर पार्टी को नुकसान पहुंचाने तक के आरोप लगाए हैं। उनके बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार इस पूरे घटनाक्रम से तेजस्वी यादव भी असहज बताए जा रहे हैं।
लंबे समय से सत्ता से बाहर रहने और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के कारण लालू प्रसाद यादव की पहले जैसी राजनीतिक पकड़ कमजोर होने की चर्चा है। वहीं चारा घोटाला और नौकरी के बदले जमीन मामले जैसे विवादों ने भी उनकी राजनीतिक स्थिति को प्रभावित किया है। दूसरी ओर मीसा भारती की महत्वाकांक्षा, रोहिणी आचार्य की नाराजगी और तेजप्रताप यादव की बगावत जैसी परिस्थितियों ने पारिवारिक संतुलन बनाए रखना और कठिन बना दिया है। परिवार की संपत्तियों को लेकर भी अंदरखाने चर्चाओं का दौर जारी है।

रोहिणी आचार्य की सार्वजनिक टिप्पणियों के बाद परिवार के भीतर बढ़ते मतभेद एक बार फिर चर्चा का विषय बन गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि प्रभाव और उत्तराधिकार की राजनीति से भी जुड़ा हुआ है। इधर परिवार से दोबारा जुड़ने की कोशिश कर रहे तेजप्रताप यादव खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक उन्हें विधान परिषद में मौका नहीं मिलने का अफसोस है और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी उनकी नाराजगी बनी हुई है।
राजद परिवार में महत्वाकांक्षा और उपेक्षा को लेकर मतभेद पहले भी सामने आते रहे हैं, लेकिन इस बार हालात पहले की तुलना में अधिक जटिल माने जा रहे हैं। परिवार और पार्टी दोनों स्तर पर नेतृत्व को लेकर असहजता साफ दिखाई दे रही है।
लालू प्रसाद यादव की बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बीच पार्टी के फैसलों में तेजस्वी यादव की भूमिका काफी मजबूत हो गई है। हालांकि परिवार के भीतर ऐसा कोई सर्वमान्य चेहरा नजर नहीं आता जो सभी पक्षों को साथ लेकर चल सके। रोहिणी आचार्य की राजनीति में बढ़ती दिलचस्पी और मीसा भारती की महत्वाकांक्षाओं को लेकर भी लंबे समय से चर्चाएं होती रही हैं। वहीं तेजस्वी खेमे का मानना है कि पार्टी के संचालन में बाहरी हस्तक्षेप बढ़ रहा है। तेजप्रताप यादव की नाराजगी ने पारिवारिक समीकरणों को और जटिल बना दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार परिवार के भीतर सबसे बड़ा संघर्ष उत्तराधिकार को लेकर है। बड़े बेटे होने के नाते तेजप्रताप यादव अपनी भूमिका को अलग नजरिए से देखते हैं, जबकि संगठन पर पकड़ और जनस्वीकार्यता के आधार पर तेजस्वी यादव परिवार और पार्टी में मजबूत स्थिति बना चुके हैं। यही स्थिति आज लालू परिवार और राजद के सामने सबसे बड़ी चुनौती के रूप में देखी जा रही है।
@MUSKAN KUMARI






