बिहार टेंडर घोटाला: रिशु श्री के नेटवर्क में फंसे बड़े अफसर, तीन गिरफ्तार; अब IAS संजीव हंस पर शिकंजा

पटना। बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। जांच में सामने आया है कि इस पूरे खेल की पटकथा सुनियोजित तरीके से तैयार की गई थी और इसमें केवल टेंडर माफिया व ठेकेदार रिशु श्री ही नहीं, बल्कि कई बड़े सरकारी अधिकारी भी शामिल थे। भ्रष्टाचार के मामले की जांच कर रही स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) की कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में कई और बड़े नाम जांच के दायरे में आ सकते हैं।

तीन बड़े अधिकारी गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजे गए

SVU ने एक साथ तीन अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। इनमें भवन निर्माण विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता तारिणी दास, वित्त विभाग के संयुक्त सचिव मुमुक्षु चौधरी और नगर विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत बुडको के कार्यपालक अभियंता उमेश कुमार सिंह शामिल हैं। सभी को पटना स्थित विशेष न्यायालय में पेश किए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इससे पहले एजेंसी टेंडर माफिया रिशु श्री और उसके सहयोगी संतोष कुमार को गिरफ्तार कर चुकी है। दोनों फिलहाल बेउर जेल में बंद हैं।

तारिणी दास ने दिए 86 करोड़ से अधिक के 13 टेंडर

भवन निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता रहे तारिणी दास वर्ष 2024 के अंत में सेवानिवृत्त हुए थे, लेकिन बिहार सरकार ने उन्हें दो वर्षों के लिए संविदा पर पुनः उसी पद पर नियुक्त कर दिया था।

सूत्रों के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा रिशु श्री से पूछताछ के दौरान पहली बार तारिणी दास का नाम सामने आया। रिशु ने जांच एजेंसी को बताया था कि उसके तारिणी दास से घनिष्ठ संबंध हैं।

जांच में यह भी सामने आया कि तारिणी दास एक-एक टेंडर की कुल राशि का 3.5 प्रतिशत कमीशन लेते थे। उनकी देखरेख में रिशु श्री की कंपनियों ‘मेसर्स रिलायबल इंटरप्राइजेज’ और ‘रिलायबल इन्फ्रा सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड’ को 86 करोड़ 43 लाख 31 हजार 266 रुपये के कुल 13 टेंडर दिए गए। इस आधार पर अनुमान है कि उन्हें 3 करोड़ रुपये से अधिक का कमीशन मिला।

ED की छापेमारी में मिला कमीशन का पूरा हिसाब

रिशु श्री के खुलासे के बाद ED ने पटना स्थित तारिणी दास के घर पर छापेमारी की, जहां से 8.53 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए। तलाशी के दौरान एक फाइल और उसके अंदर रखा लिफाफा मिला, जिसमें विभाग के विभिन्न अधिकारियों और कर्मचारियों को दिए जाने वाले कमीशन का पूरा ब्योरा दर्ज था।

कमीशन का विवरण इस प्रकार था—

कार्यपालक अभियंता (Executive Engineer) – 0.25%

सहायक अभियंता (Assistant Engineer) – 0.25%

कार्यालय के अन्य कर्मचारी – 0.07%

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इसके बाद जांच एजेंसियों को यह स्पष्ट हो गया कि भ्रष्टाचार का नेटवर्क काफी व्यापक है और तारिणी दास के कार्यकाल में स्वीकृत सभी टेंडरों की फाइलों की जांच शुरू कर दी गई।

IAS बनने से पहले सामने आया मुमुक्षु चौधरी का नाम

1999 बैच के बिहार प्रशासनिक सेवा अधिकारी मुमुक्षु चौधरी वर्तमान में वित्त विभाग में संयुक्त सचिव हैं। उनकी इच्छा नगर विकास एवं आवास विभाग में कार्य करने की थी। यदि यह मामला सामने नहीं आता तो वह जल्द ही पदोन्नति पाकर IAS अधिकारी बन सकते थे।

जांच एजेंसियों के अनुसार, वर्ष 2022 में जब मुमुक्षु चौधरी सीतामढ़ी में पदस्थापित थे, तब रिशु श्री ने तत्कालीन जिलाधिकारी सुनील कुमार यादव से उनकी नगर आयुक्त के रूप में नियुक्ति की पैरवी की थी। इसके बाद मुमुक्षु चौधरी को सीतामढ़ी नगर निगम का आयुक्त बनाया गया और वहां के कई टेंडर रिशु श्री की कंपनियों को दिए गए।

व्हाट्सएप चैट से खुला सहरसा पोस्टिंग का राज

ED को रिशु श्री के मोबाइल फोन से मिले व्हाट्सएप चैट में एक और बड़ा खुलासा हुआ। चैट में मुमुक्षु चौधरी सहरसा नगर निगम का आयुक्त बनने की इच्छा जाहिर कर रहे थे। जवाब में रिशु श्री ने लिखा था कि “रविवार को आप नगर आयुक्त बन जाएंगे।”

जांच में पाया गया कि उसी रविवार को मुमुक्षु चौधरी की सहरसा नगर आयुक्त के रूप में नियुक्ति का नोटिफिकेशन जारी हुआ था। इसके लिए रिशु श्री ने वरिष्ठ अधिकारियों पर 25 लाख रुपये खर्च किए थे।

L1, L2 और L3 सभी टेंडर रिशु की कंपनियों को

सीतामढ़ी और सहरसा में नगर आयुक्त रहते हुए मुमुक्षु चौधरी ने L1, L2 और L3 श्रेणी के लगभग सभी टेंडर रिशु श्री की कंपनियों को दिए। वर्ष 2024 में सहरसा में छठ घाट निर्माण और उसके रखरखाव का एक करोड़ रुपये का टेंडर भी रिशु श्री की कंपनी को दिया गया था।

हालांकि इसका भुगतान वर्तमान नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा के कार्यकाल में हुआ, जिसकी अब SVU जांच करेगी। मुमुक्षु चौधरी के यहां ED की छापेमारी में 2 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे।

राणा के चैट से सामने आया उमेश कुमार सिंह का नाम

रिशु श्री के सहयोगी राणा के व्हाट्सएप चैट से बुडको के कार्यपालक अभियंता उमेश कुमार सिंह का नाम सामने आया। चैट में राणा ने रिशु श्री को लिखा था कि उसने टेंडर राशि का 2.5 प्रतिशत कमीशन बुडको के इंजीनियर को दे दिया है।

इसी आधार पर की गई छापेमारी में उमेश कुमार सिंह के घर से एक करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे।

IAS संजीव हंस पर कसता जा रहा शिकंजा

इस पूरे मामले में IAS अधिकारी संजीव हंस को सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, तीन अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद से ही वह फरार हैं और SVU की रडार पर हैं।

बुधवार को पटना स्थित उनके सरकारी आवास और कार्यालय में छापेमारी की गई, लेकिन वह कहीं नहीं मिले। आरोप है कि जल संसाधन विभाग में सचिव रहते हुए उन्होंने रिशु श्री की कंपनियों को करोड़ों रुपये के 12 टेंडर दिए और इसके बदले भारी कमीशन लिया।

जेल भेजे गए आरोपियों से रिमांड पर होगी पूछताछ

मामले में अब भी कई सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं। इसके लिए जांच एजेंसी जल्द ही जेल भेजे गए आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। इसकी शुरुआत रिशु श्री से की जाएगी, जिसके बाद एक-एक कर अन्य आरोपियों से भी पूछताछ की जाएगी। माना जा रहा है कि इस दौरान भ्रष्टाचार के इस नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

@MUSKAN KUMARI

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Author: NCRLOCALDESK

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