बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के ड्रेस कोड का मुद्दा जोरदार ढंग से उठा। प्रश्नकाल के दौरान राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने पूछा कि शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड निर्धारित होने के बावजूद कई शिक्षक उसका पालन नहीं कर रहे हैं।
जवाब में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि शिक्षकों के ड्रेस कोड को लेकर शिक्षा विभाग ने वर्ष 2019 में पहली बार निर्देश जारी किए थे। इसके बाद वर्ष 2024 में इसे अधिसूचित किया गया और वर्ष 2026 में भी इस संबंध में नया पत्र जारी किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षकों को विद्यालय में गरिमापूर्ण और शालीन पोशाक पहनकर आना अनिवार्य है। यदि कोई शिक्षक इन निर्देशों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ 48 घंटे के भीतर कार्रवाई की जाएगी।
इस दौरान राजद विधायक आलोक मेहता ने कहा कि राज्य के अधिकांश सरकारी स्कूलों में शिक्षक किसी निर्धारित ड्रेस में नहीं आते हैं। इस पर उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने सदन में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि शिक्षकों के लिए छात्रों की तरह किसी विशेष यूनिफॉर्म की व्यवस्था नहीं है।

उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में यूनिफॉर्म की अनिवार्यता केवल विद्यार्थियों के लिए है। शिक्षक और शिक्षिकाएं अपनी पसंद के कपड़े पहन सकते हैं, लेकिन उनका पहनावा शिक्षक पद की गरिमा और शालीनता के अनुरूप होना चाहिए। सरकार ने शिक्षकों के लिए किसी खास रंग, डिजाइन या एक जैसी वर्दी निर्धारित नहीं की है।
सरकार के इस स्पष्टीकरण के बाद साफ हो गया है कि बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के लिए यूनिफॉर्म अनिवार्य नहीं है, लेकिन गरिमापूर्ण एवं शालीन ड्रेस पहनना अनिवार्य है। नियमों की अनदेखी करने वाले शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
@MUSKAN KUMARI





