बिहार में पंचायत सचिवों के तबादले को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। पंचायती राज विभाग की ओर से जारी तबादला सूचियों में कथित गड़बड़ियों ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि सूची में मृत, निलंबित और नौकरी छोड़ चुके कर्मचारियों के नाम तक शामिल कर दिए गए, जबकि कई पात्र कर्मचारियों को उनकी प्राथमिकता के बावजूद तबादले का लाभ नहीं मिला।
मामले की शुरुआत पंचायत सचिवों की नियुक्ति से जुड़ी प्रक्रिया से हुई। वर्ष 2014 में करीब 3100 पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी हुआ था, जिसकी प्रक्रिया 2022 में पूरी हुई। नियुक्ति के बाद करीब 2500 पंचायत सचिवों को दूसरे जिलों में पदस्थापित किया गया। कई कर्मचारियों को उनके गृह जिले से सैकड़ों किलोमीटर दूर भेजे जाने के बाद विरोध शुरू हुआ।
लगातार मांगों के बाद विभाग ने 2025 में पंचायत सचिव स्थानांतरण एवं पदस्थापन विनियमावली लागू की। इसमें दिव्यांग कर्मचारियों, महिला कर्मियों, गंभीर बीमारी से पीड़ित कर्मचारियों, पति-पत्नी के मामलों और गृह जिले से दूरी को प्राथमिकता देने का प्रावधान किया गया। तबादले के लिए तीन विकल्पों के साथ आवेदन मांगे गए और 2248 पंचायत सचिवों ने आवेदन किया।

इसके बाद फरवरी 2026 में 243 पंचायत सचिवों का तबादला किया गया। वहीं 6 अप्रैल को गंभीर बीमारी से पीड़ित कर्मचारियों के तबादले की सूची जारी हुई। बाद में जिलाधिकारियों से संबंधित कर्मचारियों की बीमारी की जांच कराने को कहा गया, जिसको लेकर विभागीय प्रक्रिया पर सवाल उठे।
सबसे बड़ा विवाद 7 अगस्त 2026 को जारी 1402 पंचायत सचिवों की तबादला सूची को लेकर सामने आया। आरोप है कि इसमें ऐसे कर्मचारियों के नाम भी शामिल थे, जिनकी मृत्यु हो चुकी थी या जो निलंबित अथवा नौकरी छोड़ चुके थे। वहीं कई गंभीर रूप से बीमार और जरूरतमंद महिला कर्मचारियों को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिलने का आरोप लगाया गया।
पंचायत सचिव संघ का दावा है कि सरकार के साथ हुए समझौते में कर्मचारियों को गृह जिले या आसपास के दो जिलों में भेजने की बात तय हुई थी, लेकिन कई कर्मियों को इससे काफी दूर पदस्थापित कर दिया गया। संघ के मुताबिक 2248 कर्मचारियों के तबादले की बात थी, जबकि सूची में 1645 नाम ही शामिल किए गए और 603 कर्मचारी बाहर रह गए।
विवाद बढ़ने के बाद पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने सूची में गड़बड़ियों को स्वीकार करते हुए अधिकारियों की लापरवाही की जांच और सूची में सुधार का भरोसा दिया है। हालांकि, पंचायत सचिव संघ का कहना है कि अभी तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
अब पंचायत सचिव संघ एक बार फिर आंदोलन की तैयारी में है। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती सिर्फ तबादला सूची में सुधार करने की नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और कर्मचारियों का भरोसा बहाल करने की भी है।
@MUSKAN KUMARI





