दरभंगा के तीन ऐतिहासिक तालाब—गंगासागर, दिग्घी और हराही—के सौंदर्यीकरण परियोजना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा कि “सौंदर्यीकरण के नाम पर जलाशयों को नहीं भरा जा सकता। पानी वाले हिस्से को हाथ मत लगाइए।” कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि अदालत की अनुमति के बिना तालाबों के क्षेत्रफल को प्रभावित करने वाला कोई भी कार्य नहीं किया जाएगा।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि तालाबों का मूल क्षेत्रफल किसी भी हालत में कम नहीं होना चाहिए। यह मामला ‘तालाब बचाओ अभियान’ और स्थानीय नागरिकों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि 800 से 900 वर्ष पुराने इन ऐतिहासिक जलाशयों के कुछ हिस्सों को भरकर सार्वजनिक सुविधाएं, मनोरंजन स्थल और दुकानें विकसित करने की योजना बनाई गई है, जो पर्यावरणीय नियमों और पूर्व के न्यायिक आदेशों का उल्लंघन है।

वहीं बिहार सरकार ने अदालत में कहा कि परियोजना का उद्देश्य जलाशयों का संरक्षण और पुनर्जीवन है। सरकार के अनुसार, मिट्टी भरने और स्टोन पिचिंग का काम केवल कटाव रोकने और तटबंध मजबूत करने के लिए सीमित क्षेत्र में किया जा रहा है। ₹100 करोड़ से अधिक की इस परियोजना में स्नान घाट, चेंजिंग रूम और शौचालय जैसी सार्वजनिक सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट फिलहाल सरकार के तर्कों से संतुष्ट नहीं हुआ और विवादित कार्यों पर रोक बरकरार रखते हुए मामले की अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया।
@MUSKAN KUMARI





