पटना। बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल सुधार को लेकर आज एक अहम और हाई-लेवल बैठक होने जा रही है। शाम 4 बजे लोकभवन में आयोजित इस बैठक में कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन, उच्च शिक्षा मंत्री संजय टाइगर, राज्य के सभी प्रमुख विश्वविद्यालयों के कुलपति और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
बैठक का मुख्य एजेंडा समर्थ पोर्टल (Samarth Portal) में लगातार सामने आ रही तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं की समीक्षा और उनके त्वरित समाधान पर चर्चा करना है। राज्य में अब एडमिशन, परीक्षा फॉर्म, रिजल्ट और छात्र-प्रशासन से जुड़ी अधिकांश प्रक्रियाएं इसी डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित की जा रही हैं।
हालांकि, इस डिजिटल व्यवस्था के बीच एक बड़ा विवाद तब खड़ा हो गया जब यह सामने आया कि बिहार के विश्वविद्यालयों में 13 लाख से अधिक डिग्रियां अब तक पोर्टल पर अपलोड नहीं हो सकी हैं। इस गंभीर लापरवाही पर कुलाधिपति ने नाराजगी जताते हुए सभी विश्वविद्यालयों को सख्त निर्देश दिया है कि लंबित डिग्रियों को एक महीने के भीतर हर हाल में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाए।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में सिर्फ तकनीकी खामियों पर चर्चा नहीं होगी, बल्कि विश्वविद्यालयों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। सरकार वर्षों पुराने मैनुअल सिस्टम को समाप्त कर उच्च शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और गति लाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।
बैठक में पोर्टल की धीमी गति, सर्वर संबंधी समस्याएं, स्टाफ की कमी और डेटा एंट्री में हो रही देरी जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा होगी। हाल के महीनों में छात्रों द्वारा समर्थ पोर्टल को लेकर लगातार शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, जिससे विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
सरकारी सूत्रों का मानना है कि लोकभवन की यह बैठक बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की दिशा में निर्णायक साबित हो सकती है। समय पर सुधार नहीं होने की स्थिति में छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच असंतोष और बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
@MUSKAN KUMARI






