सीतामढ़ी का कुख्यात अपराधी रंजन पाठक एनकाउंटर में ढेर, 25,000 रुपये का था इनाम

नई दिल्ली/सीतामढ़ी।
दिल्ली के रोहिणी इलाके में 22 और 23 अक्टूबर की दरमियानी रात हुए बड़े एनकाउंटर में बिहार के सीतामढ़ी जिले का कुख्यात अपराधी रंजन पाठक मारा गया। रंजन पर ₹25,000 का इनाम घोषित था और वह लंबे समय से बिहार पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था।

दिल्ली पुलिस और बिहार पुलिस की संयुक्त कार्रवाई

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और बिहार पुलिस की संयुक्त टीम ने बुधवार देर रात यह कार्रवाई की। एनकाउंटर में रंजन के साथ चार बदमाशों को घेरा गया, जिनमें रंजन पाठक, बिनोद महतो उर्फ़ बिनोद साहनी, मनीष पाठक और दिल्ली के कादम नगर निवासी अमन खान शामिल थे।

मुठभेड़ में पुलिस और अपराधियों के बीच लगभग 2:50 बजे बहादुर शाह मार्ग पर जोरदार फायरिंग हुई। जवाबी कार्रवाई में रंजन पाठक और एक अन्य अपराधी गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

“सिम्मा एंड कंपनी” गैंग का सरगना था रंजन

सीतामढ़ी के सुरसंड थाना क्षेत्र के मलाही गांव का रहने वाला रंजन पाठक अपने गिरोह “सिम्मा एंड कंपनी” का सरगना था। इस गिरोह ने सीतामढ़ी और ब्रह्मपुरा इलाकों में कई आपराधिक वारदातों को अंजाम दिया था, जिनमें लूट, रंगदारी, गोलीबारी और अपहरण के कई मामले दर्ज हैं।

रंजन और उसके सहयोगी कुशाल पाठक, आदित्य सिंह और मदन कुमार के खिलाफ कई बड़ी वारदातों में नाम सामने आया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, वह हाल के दिनों में राजनीतिक नतीजों को प्रभावित करने और सांप्रदायिक तनाव फैलाने की साजिश रच रहा था।

एनकाउंटर के बाद खत्म हुआ कुख्यात गिरोह

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, रंजन पाठक को बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सक्रिय देखा गया था। वह खुद को “बायसोटा” संगठन का कार्यकर्ता बताता था और सोशल मीडिया के ज़रिए अपनी आपराधिक गतिविधियों को वैचारिक आवरण देने की कोशिश कर रहा था।

पुलिस ने बताया कि इस एनकाउंटर के बाद “सिम्मा एंड कंपनी” गिरोह का लगभग अंत हो गया है। गिरोह के कुछ सदस्य अब भी फरार हैं, जिनकी तलाश में बिहार और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम जुटी हुई है।

अपराध की दुनिया से अंत तक भिड़ने वाला रंजन

रंजन खुद को भ्रष्ट सिस्टम और अन्यायपूर्ण पुलिस कार्रवाई के खिलाफ लड़ने वाला बताता था। उसने कभी किसी धर्म या जाति के नाम पर हथियार नहीं उठाने की बात कही थी। हालांकि, उसकी आपराधिक गतिविधियां और लगातार गैंगवारों में संलिप्तता ने उसे पुलिस के निशाने पर ला दिया था।

एनकाउंटर पर बोले अधिकारी

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह मुठभेड़ योजना के तहत की गई संयुक्त कार्रवाई का हिस्सा थी।

“रंजन पाठक पर लंबे समय से नजर रखी जा रही थी। वह कई राज्यों में फरार था। उसकी गिरफ्तारी या मौत पुलिस के लिए बड़ी राहत है।” — दिल्ली पुलिस प्रवक्ता

फिलहाल जांच जारी

फिलहाल पुलिस गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश में जुटी है। एनकाउंटर की पूरी घटना की फॉरेंसिक जांच और आंतरिक रिपोर्टिंग दिल्ली पुलिस मुख्यालय को भेजी गई है।

Noida Desk
Author: Noida Desk

मुख्य संपादक (Editor in Chief)

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