जिलाधिकारी सावन कुमार की अध्यक्षता में गठित जिलास्तरीय निरीक्षण समिति ने समाज कल्याण विभाग के जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा संचालित विभिन्न बाल देख-रेख संस्थानों का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान बच्चों के आवासन, भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया गया।
निरीक्षण की शुरुआत सुखपुर स्थित पर्यवेक्षण गृह से हुई। यहां जिलाधिकारी ने बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का बारीकी से निरीक्षण किया और अधिकारियों को बच्चों के लिए सुरक्षित एवं अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

अवैध रूप से बच्चा गोद देने पर सख्त कार्रवाई
पिपरा रोड स्थित विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान के निरीक्षण के दौरान डीएम ने स्वास्थ्य विभाग को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिले के सभी सरकारी और निजी चिकित्सा संस्थानों को स्पष्ट रूप से सूचित किया जाए कि किसी भी परित्यक्त या बेसहारा बच्चे को केवल अधिकृत संस्थान के माध्यम से कानूनी प्रक्रिया के तहत ही गोद दिया जा सकता है। किसी अस्पताल द्वारा अवैध रूप से बच्चा सौंपना गंभीर और दंडनीय अपराध माना जाएगा।

60 बच्चों से किया संवाद
चैनसिंहपट्टी स्थित वृहद आश्रय गृह में जिलाधिकारी ने वहां रह रहे करीब 60 बच्चों से बातचीत की और उन्हें मिलने वाली सरकारी सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने परिसर की स्वच्छता और आवासन व्यवस्था पर संतोष जताया।
डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन बच्चों के परिवारों की पहचान हो चुकी है, उनकी काउंसलिंग और आवश्यक कागजी प्रक्रिया जल्द पूरी कर पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। दूसरे जिलों से आए बच्चों के मामलों में संबंधित बाल कल्याण समिति के साथ समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
इसके अलावा संस्थानों में रह रहे बच्चों को सामान्य शिक्षा के साथ उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार कौशल विकास का प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए गए, ताकि वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें।
@MUSKAN KUMARI





