पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल में जनवितरण प्रणाली यानी PDS के जरिए उपभोक्ताओं को मिलने वाले चावल की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि बाढ़ बाजार समिति स्थित CMR गोदाम से खराब और घटिया गुणवत्ता का चावल SFC गोदाम भेजा जा रहा है, जहां से इसे जनवितरण दुकानों के जरिए उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा रहा है।
स्थानीय उपभोक्ताओं का आरोप है कि कई जगहों पर उन्हें सड़ा, खराब और मिलावटी चावल मिल रहा है। राशन पर निर्भर लोगों के सामने खराब गुणवत्ता का चावल लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं होने की भी बात कही जा रही है।

मजदूरों ने कैमरे पर दिखाया खराब चावल
मामला तब सामने आया जब गोदाम में काम करने वाले कुछ मजदूरों ने कैमरे पर चावल की गुणवत्ता दिखाई। उन्होंने गोदाम में रखी बोरियों को खोलकर चावल दिखाया और दावा किया कि इसकी गुणवत्ता तय मानकों के अनुरूप नहीं है।
मजदूरों का आरोप है कि खराब चावल को बोरियों में भरकर जनवितरण प्रणाली के लिए आगे भेजने की तैयारी की जा रही है।
CMR से SFC और फिर PDS दुकानों तक पहुंचता है चावल
बताया जा रहा है कि बाढ़ बाजार समिति स्थित CMR गोदाम से चावल SFC गोदाम पहुंचता है और वहां से जनवितरण दुकानों को इसकी आपूर्ति की जाती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर CMR स्तर पर ही खराब चावल की आपूर्ति हो रही है तो गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया में इसे रोका क्यों नहीं गया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि गोदाम से चावल निकलने से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर होती है और कथित तौर पर खराब चावल को आपूर्ति की अनुमति कैसे मिल जाती है?
अधिकारी के जवाब पर भी सवाल
चावल की गुणवत्ता और मजदूरों के आरोपों को लेकर CMR गोदाम में तैनात एक अधिकारी से सवाल किया गया, लेकिन उन्होंने स्पष्ट जवाब देने के बजाय टालमटोल की। मौके पर मामले पर आधिकारिक बयान देने के लिए कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं था।
मजदूरों द्वारा कैमरे पर दिखाई गई तस्वीरों के बाद अब राशन वितरण व्यवस्था और खाद्यान्न की गुणवत्ता जांच को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, चावल की गुणवत्ता को लेकर लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अब निगाहें संबंधित विभाग की जांच और कार्रवाई पर हैं।
@MUSKAN KUMARI





