झारखंड में JSSC-CGL समेत 44 भर्ती परीक्षाओं के परिणाम रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ अभ्यर्थियों का विरोध तेज हो गया है। बुधवार को JSSC-CGL परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों ने रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों ने सरकार के फैसले को मनमाना और प्राकृतिक न्याय के खिलाफ बताते हुए अपनी नौकरी वापस देने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नौकरी मिली थी और कई उम्मीदवारों ने नौकरी मिलने के बाद अपनी पुरानी नौकरियां तक छोड़ दी थीं। अब परिणाम रद्द होने के बाद वे दोबारा बेरोजगार हो गए हैं। अभ्यर्थियों ने कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन सभी सफल उम्मीदवारों को एक ही नजर से देखना उचित नहीं है।
प्रदर्शन के बीच बीजेपी सांसद दीपक प्रकाश ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि छात्र पूरे मामले की CBI जांच की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में बड़े लोगों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।

राज्य सरकार के आदेश के मुताबिक, 2014 से अब तक JPSC और आउटसोर्स एजेंसी TSR डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आयोजित 44 परीक्षाओं के परिणाम रद्द किए गए हैं। इनमें ड्रग इंस्पेक्टर, असिस्टेंट प्रोफेसर, डिप्टी कलेक्टर, असिस्टेंट इंजीनियर, सिविल जज और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर समेत कई पदों की परीक्षाएं शामिल हैं।
वहीं, छात्र नेता रवींद्र पासवान के अनुसार आंदोलन का बुधवार को 26वां दिन रहा। सरकार ने JPSC और JSSC में परीक्षा सुधारों के अध्ययन के लिए IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में कमेटी गठित की है, जिसे दो महीने में रिपोर्ट देनी है। हालांकि, छात्रों ने न्यायिक जांच को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर असंतोष जताया है।
अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे अदालत का रुख करेंगे।
@MUSKAN KUMARI





