मुजफ्फरपुर के कांटी में सुधा डेयरी से निकलने वाले कथित दूषित और केमिकलयुक्त पानी को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। आरोप है कि डेयरी का अपशिष्ट पानी लंबे समय से आसपास की करीब 40 एकड़ निजी जमीन में बह रहा है। इससे खेती प्रभावित होने के साथ स्थानीय लोगों की परेशानियां और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी बढ़ी हैं।
मामले को लेकर तिरहुत प्रमंडल के कमिश्नर गिरिवर दयाल ने अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में कांटी विधायक अजीत कुमार, मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी कुमार गौरव, सुधा डेयरी के प्रबंध निदेशक समेत NHAI, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, PHED और राजस्व विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
कमिश्नर ने पर्यावरण नियमों के उल्लंघन पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की बात कही। उन्होंने अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ मामले का त्वरित और विधिसम्मत समाधान निकालने का निर्देश दिया।
मामले की जांच के लिए दो बहु-सदस्यीय समितियां गठित की गई हैं। पहली समिति की अध्यक्षता उप विकास आयुक्त करेंगे। यह समिति सुधा डेयरी से निकलने वाले पानी की गुणवत्ता और ट्रीटमेंट प्लांट की कार्यक्षमता की जांच करेगी। PHED के अधिकारी पानी के नमूने लेकर उसमें मौजूद रासायनिक तत्वों की जांच करेंगे।

वहीं, अपर समाहर्ता की अध्यक्षता वाली दूसरी समिति अपशिष्ट जल की निकासी के लिए उपयुक्त जमीन की उपलब्धता का सर्वे करेगी और आवश्यक कार्रवाई का प्रस्ताव तैयार करेगी।
दोनों समितियों को एक सप्ताह के भीतर तथ्यपरक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगा। लक्ष्य है कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए जरूरी संरचनाओं का निर्माण 15 सितंबर या नवरात्र के आसपास शुरू किया जा सके।
अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है, जिसके आधार पर सुधा डेयरी के अपशिष्ट पानी की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा तय होगी।
@MUSKAN KUMARI






