25 उम्मीदवारों की खबर चली, लेकिन मेरी क्यों नहीं?

क्या गरीब उम्मीदवार की आवाज़ मीडिया तक नहीं पहुँचती?

बांकीपुर उपचुनाव के बाद एक उम्मीदवार की कलम से

तनवीर आलम शेख**

बांकीपुर उपचुनाव खत्म हो गया, लेकिन मेरे मन में कुछ ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब आज भी नहीं मिला।

मैंने पूरे दमखम से चुनाव लड़ा। जनता के बीच गया, हर मोहल्ले और हर गली में अपनी बात रखी। लेकिन चुनाव के दौरान मैंने महसूस किया कि मेरी गतिविधियों को कई मीडिया संस्थानों, अखबारों और YouTube चैनलों में वह जगह नहीं मिली, जो अन्य उम्मीदवारों को मिल रही थी।

यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव है कि कई मंचों पर मेरी खबरें प्रकाशित या प्रसारित नहीं की गईं। कुछ लोगों ने यह भी संकेत दिया कि समाचार कवरेज के लिए आर्थिक सहयोग या विज्ञापन की आवश्यकता होगी। मैंने इस रास्ते को स्वीकार नहीं किया, क्योंकि मेरा मानना है कि लोकतंत्र में खबर पैसे से नहीं, उसके महत्व से तय होनी चाहिए।

मैं किसी एक मीडिया संस्थान पर आरोप नहीं लगा रहा हूँ, लेकिन एक बड़ा सवाल ज़रूर पूछ रहा हूँ—

क्या लोकतंत्र में केवल वही उम्मीदवार दिखाई देगा जिसके पास पैसा होगा?
क्या सीमित संसाधनों वाला उम्मीदवार जनता तक अपनी बात पहुँचाने का समान अवसर नहीं पाएगा?
क्या मीडिया का दायित्व सभी उम्मीदवारों को निष्पक्ष अवसर देना नहीं है?

यह लेख किसी से शिकायत नहीं, बल्कि लोकतंत्र और मीडिया की भूमिका पर एक गंभीर सवाल है। मैं चाहता हूँ कि भविष्य में हर उम्मीदवार—चाहे वह किसी भी दल का हो, स्वतंत्र हो, अमीर हो या गरीब—उसे समान सम्मान और निष्पक्ष कवरेज मिले।

मैं उन सभी मतदाताओं का आभारी हूँ जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया। मेरा संघर्ष चुनाव तक सीमित नहीं है। मैं जनता की आवाज़ उठाता रहूँगा और सच को जनता तक पहुँचाने का प्रयास करता रहूँगा।

**लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब हर आवाज़ को सुना जाएगा।**

**– तनवीर आलम शेख**

Noida Desk
Author: Noida Desk

मुख्य संपादक (Editor in Chief)

Share this post:

खबरें और भी हैं...

लाइव क्रिकट स्कोर
[the_ad_group id="65"]
मौसम अपडेट
राशिफल