पटना: नीतीश कुमार के करीबी रहे वरिष्ठ नेता अरविंद कुमार उर्फ छोटू सिंह को छह वर्षों के लिए जनता दल (यूनाइटेड) से निष्कासित किए जाने के बाद पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। पार्टी नेतृत्व जहां इस कार्रवाई को अनुशासन बनाए रखने के लिए जरूरी बता रहा है, वहीं कुछ नेता इसे जल्दबाजी में लिया गया फैसला मान रहे हैं।
जदयू ने छोटू सिंह को कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप में छह साल के लिए निष्कासित किया है। इसके साथ ही उन्हें बिहार राज्य नागरिक परिषद के महासचिव पद से भी हटा दिया गया है।
बताया जा रहा है कि जदयू की नई प्रदेश कार्यकारिणी घोषित होने के बाद छोटू सिंह ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई थी। उनका एक वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें वह राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के सामने नई प्रदेश टीम को लेकर आपत्ति जताते दिखाई दिए। पार्टी नेतृत्व ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए कार्रवाई की।

हालांकि, मोकामा विधायक अनंत सिंह ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है। उन्होंने छोटू सिंह के निष्कासन को जल्दबाजी में लिया गया निर्णय बताते हुए कहा कि पहली बार हुई गलती को माफ किया जाना चाहिए। अनंत सिंह ने सवाल उठाया कि बड़े नेताओं की गलतियों पर कार्रवाई नहीं होती, जबकि छोटे कार्यकर्ताओं पर तुरंत कार्रवाई कर दी जाती है।
उन्होंने छोटू सिंह को नीतीश कुमार का पुराना और समर्पित सहयोगी बताते हुए कहा कि यदि किसी संगठनात्मक फैसले पर उन्होंने आपत्ति जताई थी तो उनकी बात सुनी जानी चाहिए थी। सूत्रों के अनुसार, कई जदयू नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी नीतीश कुमार से इस कार्रवाई पर पुनर्विचार की मांग की है।
छोटू सिंह के निष्कासन के बाद पार्टी के भीतर समर्थन और विरोध की आवाजें सामने आने से जदयू की अंदरूनी सियासत गरमा गई है।
@MUSKAN KUMARI






