जहानाबाद: मशहूर शायर दुष्यंत कुमार की पंक्तियां— “कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों”— आज बिहार के जहानाबाद जिले की बेटी शुभांगी की सफलता पर पूरी तरह चरितार्थ होती हैं। छोटे से गांव से निकलकर भारतीय सेना के मेडिकल कोर में लेफ्टिनेंट बनने तक का उनका सफर मेहनत, लगन और अटूट संकल्प की प्रेरणादायक मिसाल है।
जहानाबाद जिले के लारी गांव की रहने वाली शुभांगी ने भारतीय थल सेना के मेडिकल कोर में लेफ्टिनेंट के रूप में नियुक्त होकर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे बिहार का गौरव बढ़ाया है। उनकी यह उपलब्धि वर्षों की कठिन मेहनत, अनुशासन और देशसेवा के प्रति समर्पण का परिणाम है।
शुभांगी ने वर्ष 2022 में आयोजित NEET परीक्षा में 650 अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसके बाद उनका चयन देश के प्रतिष्ठित Armed Forces Medical College (AFMC), पुणे में MBBS पाठ्यक्रम के लिए हुआ। मेडिकल शिक्षा पूरी करने के बाद वर्ष 2026 में उन्होंने भारतीय सेना के मेडिकल कोर में लेफ्टिनेंट के रूप में अपनी सेवाएं शुरू कीं।

उनकी इस सफलता के पीछे परिवार का भी अहम योगदान रहा। पिता राकेश कुमार और माता सविता कुमारी ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। वहीं उनके बाबा डॉ. शिवपूजन शर्मा क्षेत्र के सम्मानित व्यक्तियों में गिने जाते हैं। शुभांगी की प्रारंभिक शिक्षा जहानाबाद के डीएवी स्कूल से हुई, जहां से उनकी प्रतिभा लगातार निखरती गई।
आज शुभांगी की इस उपलब्धि से पूरा जहानाबाद और बिहार गर्व महसूस कर रहा है। उनकी सफलता ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि बड़े सपने पूरे करने के लिए संसाधनों से ज्यादा जरूरी मजबूत इरादे, कठिन परिश्रम और आत्मविश्वास होता है।
शुभांगी की यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि बिहार की बेटियों के बढ़ते आत्मविश्वास, शिक्षा और देशसेवा के प्रति समर्पण का भी सशक्त उदाहरण है।
@MUSKAN KUMARI






