अंतर्राष्ट्रीय संसदीय दिवस आज: जनविश्वास से जनप्रतिनिधित्व तक, संसद की नई कसौटी पर मंथन

नई दिल्ली: आज अंतर्राष्ट्रीय संसदीय दिवस मनाया जा रहा है। यह दिवस केवल संसदों का उत्सव नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका, जवाबदेही और जनविश्वास पर आत्ममंथन का अवसर भी है। लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति केवल चुनाव नहीं, बल्कि सतत संवाद है और यही संवाद संसद के माध्यम से देश की नीतियों, प्राथमिकताओं और भविष्य की दिशा तय करता है।

 

संसद को लोकतंत्र की नैतिक चेतना माना जाता है, जहाँ करोड़ों नागरिकों की आकांक्षाएँ, असहमतियाँ और उम्मीदें राष्ट्रीय संकल्प का रूप लेती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संसद की गरिमा उसकी कार्यवाही, विचारशीलता, संवेदनशीलता और जवाबदेही से तय होती है। ऐसे में यह दिवस इस बात पर विचार करने का अवसर देता है कि लोकतांत्रिक संस्थाएँ वास्तव में हर नागरिक की आवाज़ को समान महत्व दे रही हैं या नहीं।

 

वर्तमान समय में संसदों के सामने सबसे बड़ी चुनौती गुणवत्तापूर्ण और समावेशी प्रतिनिधित्व की है। महिलाओं, युवाओं, आदिवासी समुदायों, दलितों, दिव्यांगजनों और वंचित वर्गों की प्रभावी भागीदारी लोकतंत्र को अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्णय प्रक्रिया में सभी वर्गों की सहभागिता से नीतियाँ अधिक न्यायपूर्ण और संतुलित बनती हैं।

 

इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय संसदीय दिवस का वैश्विक फोकस मानवाधिकारों को नीति निर्माण के केंद्र में रखने पर है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करने में संसदों की सक्रिय भूमिका को भी रेखांकित किया जा रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और सामाजिक समानता जैसे मुद्दों पर गंभीर एवं परिणामोन्मुख बहस को लोकतांत्रिक विकास की आधारशिला माना जा रहा है।

 

विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत की संसद की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। संसदीय विशेषज्ञों के अनुसार, लोकतंत्र तब सबसे प्रभावी बनता है जब संसद में संख्याबल से अधिक विचारों का महत्व हो, असहमति का सम्मान हो और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि रखा जाए।

 

तकनीक के विस्तार ने संसदीय कार्यवाही को आम नागरिकों तक अधिक सुलभ बनाया है, लेकिन लोकतंत्र की वास्तविक मजबूती जागरूक नागरिक सहभागिता से ही संभव है। नागरिकों की सक्रिय भागीदारी, पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसंवाद लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाते हैं।

 

अंतर्राष्ट्रीय संसदीय दिवस लोकतंत्र के प्रति सामूहिक पुनर्संकल्प का संदेश देता है। यह याद दिलाता है कि संसद की सबसे बड़ी सफलता केवल कानून बनाना नहीं, बल्कि हर नागरिक तक न्याय, सम्मान और अवसर सुनिश्चित करना है। संसद जितनी संवेदनशील, समावेशी और जवाबदेह होगी, लोकतंत्र उतना ही मजबूत और विश्वसनीय बनेगा।

@MUSKAN KUMARI

NCRLOCALDESK
Author: NCRLOCALDESK

Share this post:

खबरें और भी हैं...

लाइव क्रिकट स्कोर
[the_ad_group id="65"]
मौसम अपडेट
राशिफल